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Kannauj News: पानी के लिए बनाए गए अमृत सरोवर प्यासे

Sun, 14 May 2023 11:33 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
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कन्नौज। जल संचयन के लिए बनाए गए अमृत सरोवर बेमकसद साबित हो रहे हैं। गर्मी में इन तालाबों में पानी ही नहीं है। मनरेगा के तहत बने तालाब खुद सूखे पड़े हैं। उनमें धूल उड़ रही है। मवेशियों, पक्षियों की प्यास बुझाने का दावा बेकार साबित हो रहा है।
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जिले में पिछले साल बड़े पैमाने पर अमृत सरोवर का काम शुरू हुआ था। अलग-अलग अंतराल में जिले भर के अलग-अलग हिस्सों में 205 तालाब को अमृत सरोवर के तहत चिह्नित किया गया। अफसरों के मुताबिक इनमें से 126 तालाब का काम पूरा हो चुका है। शेष 79 तालाबों में काम होना है। यह तालाब मनरेगा के तहत बनवाए गए हैं, जिसमें ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत का योगदान है। जिला पंचायत को भी अमृत सरोवर का निर्माण कार्य कराना है, लेकिन अब तक उनका काम अधूरा है। करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर बनाए जा रहे अमृत सरोवर गर्मियों में काम नहीं आ सकेंगे।
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बच्चे तालाब में खेलते हैं कबड्डी और क्रिकेट
मकसद तो यही था कि तालाब का सौंदर्यीकरण कराने से उसमें हर समय जल रहेगा। तालाब के चारों ओर हरियाली होगी। हकीकत यह है कि एक-दो तालाब को छोड़ दें तो शेष सूखे पड़े हैं। बच्चों ने उन्हें खेल का मैदान बना रखा है। क्रिकेट खेला जा रहा है तो कहीं कबड़डी।
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जिले के हर ब्लॉक में इस तरह है अमृत सरोवर

ब्लॉक संख्या उमर्दा- 42, कन्नौज- 31, सौरिख-30, तालग्राम- 27, हसेरन- 27, छिबरामऊ- 26, जलालाबाद-13, गुगरापुर- 09

अमृत सरोवर में किसी तरह की कमी न हो, इसके लिए विभाग की ओर से काम करवाया जा रहा है। कमियों को दूर करने के लिए सभी प्रधान,
सचिव आदि को निर्देश दिए जाएंगे। -दयाराम यादव, उपायुक्त मनरेगा

फोटो:12- तालाब के किनारे लगा शिलापट। संवाद

भीषण गर्मी में सूख गए सरोवर, पौधे भी गायब
छिबरामऊ। बरसात के पानी को सहेजने और भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने के उद्देश्य से ब्लॉक क्षेत्र में बनाए गए अमृत सरोवर सूखे हुए हैं। तेज हवा चलने पर इनमें धूल उड़ती देखी जा सकती है। शासन ने सुंदरीकरण और निर्माण के लिए करोड़ों रुपये पिछले वर्ष खर्च किए थे, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते यह अमृत सरोवर बदहाली के आंसू बहा रहे हैं। छिबरामऊ ब्लॉक की ग्राम पंचायत कसावा में लाखों रुपये की लागत से बने अमृत सरोवर तालाब भीषण गर्मी में पूरी तरह से सूखा हुआ है। यहां पर लगाए गए पौधे गायब हैं। अब इन तालाबों का उपयोग गांव के बच्चे क्रिकेट खेलने के लिए मैदान के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों को मवेशियों को पानी पिलाने के लिए सरकारी संसाधनों की बजाय खुद के संसाधनों से व्यवस्था करनी पड़ रही है। पंचायती राज विभाग ने कई तालाबों का सौंदर्यीकरण कराया था जो अब देखरेख के अभाव में बदहाली के आंसू बहा रहे हैं। पंचायती राज विभाग ने तालाबों को चिह्नित कर मनरेगा के माध्यम से उसमें कच्चा काम कराया था। इनमें उनकी साफ-सफाई के अलावा खुदाई, समतलीकरण और पटरियां बनाने का कार्य शामिल रहा। पिछले साल 15 अगस्त को इन्हीं सरोवर तालाबों पर ध्वजारोहण हुआ था।
डीडीओ नरेंद्र द्विवेदी का कहना है कि पंचायत सचिवों से तालाबों की रिपोर्ट मांगी जाएगी। जिन तालाबों में पानी नहीं है, उनमें तत्काल भरवाया जाएगा। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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