जलालाबाद (कन्नौज)। जिला कारागार से दो विचाराधीन बंदियों के भागने के बाद जेल अधीक्षक की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। फतेहगढ़ जेल में पुराने कंबलों से काऊ कोट बनाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी तारीफ मन की बात में की थाी। इसके बाद तो वह जेल में अपने मन की करने लगे थे। कन्नौज में स्थानांतरण होने के बाद यहां भी उन्होंने अपने मन की दिखाई तो बंदियों व जेल कर्मियों में असंतोष व्याप्त हो गया।
जिला जेल के अधीक्षक भीमसेन मुकंद का कार्यकाल लगातार विवादों में रहा है। उनके प्रशासनिक फैसलों, व्यवहार और पूर्व के अनुभवों को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं, जो जेल की व्यवस्था और सुरक्षा पर भी असर डालते हैं। भीमसेन मुकंद के सेवाकाल में कई ऐसे मौके आए जब उन पर गंभीर आरोप लगे या वह विवादों में घिरे रहे। वर्ष 1998-99 में जब वे मथुरा जिला कारागार में जेलर के पद पर तैनात थे, तब नवीन निर्माण के दौरान प्राचीन काल की मूर्तियां गायब होने का आरोप लगा। इस मामले में सीबीआई जांच भी हुई थी, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी। वर्ष 2000 में तत्कालीन कारागार मंत्री के साथ हुए विवाद के चलते उनका स्थानांतरण पूर्वांचल की किसी जेल में कर दिया गया था। यह घटना उनके प्रशासनिक व्यवहार पर सवाल उठाती है। अपने रसूख के बल पर उन्होंने नवनिर्मित जिला जेल फिरोजाबाद में जेलर के पद पर तैनाती पाई। वहां तत्कालीन अधीक्षक सेवाराम चौधरी के साथ हुए विवाद के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया।
इसके बाद जब उनका स्थानांतरण अलीगढ़ हुआ, तो वहां भी तत्कालीन अधीक्षक सेवाराम चौधरी के होने के कारण उन्होंने कार्यभार ग्रहण नहीं किया। इस अवहेलना के चलते शासन द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अधीक्षक बनने के बाद जब उनकी तैनाती गौतमबुद्ध नगर हुई, तो वहां मशक्कत के नाम पर वसूली बढ़ाने और बंदियों को परेशान करने का आरोप लगा। जेल स्टाफ के भारी विरोध के चलते उन्हें मात्र छह महीने में ही जिला जेल मऊ स्थानांतरित कर दिया गया। मऊ से जिला जेल फतेहगढ़ भेजे जाने पर, उनके जेल अधीक्षक रहते छुट्टी न देने के कारण जेल वार्डर की मौत हो गई थी। इस घटना पर कैदियों और स्टाफ ने जमकर हंगामा किया था। फतेहगढ़ से भी उन्हें धन उगाही के चलते कैदी से मारपीट के मामले में हटाकर कन्नौज भेजा गया। यह घटना जेल में कैदियों के साथ दुर्व्यवहार और अवैध वसूली का सशक्त उदाहरण है। कन्नौज जिला कारागार में भी कमोवेश यही हाल है। अब बंदियाें के भागने की घटना ने उनकी कार्यशैली व लापरवाही की पोल खोल कर रख दी। इन गंभीर आरोपों और घटनाओं के बावजूद उनका लगातार विभिन्न जेलों में तैनाती पाना, उनके रसूख की ओर भी इशारा करता है।
वर्जन
जेल अधीक्षक ने दी सफाई
जेल अधीक्षक भीमसेन मुकंद ने सफाई देते हुए कहा है कि सुबह 9.35 बजे बिजली चली जाने के कारण कैमरे बंद थे। उन्होंने दावा किया कि दोनों कैदी 9.22 बजे तक कैमरे में दिखाई दे रहे थे। जेल परिसर में लगे 50 कैमरों में से 49 क्रियाशील हैं, लेकिन अधिक कैमरों के कारण इन्वर्टर से बिजली कटौती के दौरान वह काम नहीं कर पाते हैं। उनके ऊपर जितने भी आरोप लगे हैं, सभी जांच में क्लीन चिट मिली है। जेल में सुधारों के लिए भी उनका नाम लिया जाता है। फतेहगढ़ जेल के भोजन को आईएसओ व एफएसएसएआई प्रमाण पत्र दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही है।
जिला जेल से फरार बंदियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज
गुरसहायगंज। कोतवाली क्षेत्र की चौकी अनौगी स्थित जिला जेल के जेलर विनय प्रताप सिंह ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि सोमवार सुबह कारागार को खोला गया था। करीब साढ़े नौ बजे से दस बजे के मध्य मेनवाल पर टावर नंबर एक से दो के बीच से थाना तालग्राम के गांव हजिरापुर निवासी 22 वर्षीय अंकित व थाना ठठिया के मलगंवा निवासी 22 वर्षीय डिंपी उर्फ शिवा फरार हो गए। जेल मैनुअल के तहत चार सर्च टीमें गठित की गई हैं, जिन्हें रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड सहित संभावित स्थानों पर तलाश के लिए भेजा गया है। साथ ही कारागार मुख्यालय एवं परिक्षेत्रीय कार्यालय को घटना की सूचना दी गई है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को आख्या भेजी जा रही है। कोतवाली प्रभारी अजय अवस्थी ने बताया कि भागने करने वाले अंकित व डंपी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
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हर गेट पर देने पड़ते 20 रुपये
मंगलवार को जिला जेल में निरुद्ध 27 कैदियों से मिलाई के लिए पर्ची लगाई गई। दोपहर 12 बजे एक पर्ची पर तीन लोगों की मिलाई के हिसाब से करीब 55 से 60 लोग मिलने पहुंचे।परिजनों से मिलाई करके वापस आए लोगों ने बताया कि कैदियों से जमकर धन उगाही हो रही है। मिलाई के बाद बंदी वापस बैरक में जाता है तो प्रत्येक गेट पर 20 रुपए देने पड़ते हैं। जेल आने के समय पहले ही मशक्कत के नाम पर भारी भरकम रकम वसूली जाती है। गरीब कैदी जो रुपये देने में असमर्थ है, उससे काम लिया जाता है वहीं जेल में संचालित कैंटीन पर दोगुने पैसे में सामान मिलता है
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जिला जेल में बंदियों की मौत का सिलसिला रहा जारी
कन्नौज। वर्ष 2014 में एक कैदी की मौत के बाद बंदियों ने जमकर उपद्रव किया था। सैकड़ों कैदी जेल की छत पर चढ़कर 20 घंटे तक हंगामा करते रहे थे। उच्च अधिकारियों और नेताओं के हस्तक्षेप के बाद ही मामला शांत हुआ था। इसके बाद से भी मौत का सिलसिला थमा नहीं है।
-23 मई 2021 को थाना तालग्राम के गांव गड़िया सकरहानी में गजेंद्र सिंह की मौत हुई।
-15 अगस्त 2021 को कोतवाली गुरुसहायगंज गड़रियनपुरवा के संग्राम की जेल में फांसी लगाकर मौत हुई।
-01 मई 2022 को इन्दरगढ़ के ग्राम भोरामऊ प्रखर ने फांसी लगाकर जान दी।
-26 सितंबर 2022 को थाना सोरिख के गांव नगलादीन भीखम की मौत हुई।
-14 फरवरी 2025 को गुरुसायगंज के प्रतापपुर निवासी सूरज ने फांसी लगाकर आत्महत्या की। परिजनों ने जेल प्रशासन पर हत्या कर शव टांगने का आरोप लगाया था, जिसके बाद काफी हंगामा हुआ।