मुख्यमंत्री ने कन्नौज के डार्क ब्लाक घोषित जलालाबाद और तालग्राम क्षेत्र में नहर (रजबहा व आधा दर्जन माइनरें) बनाने का जो सपना देखा है उस पर नौकरशाहों की लेटलतीफी का ग्रहण लग गया है। सीएम की घोषणा के तीन महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो सका है।
अफसरों की लापरवाही का खामियाजा हजारों किसानों को भोगना पड़ेगा। उन्हें सिंचाई के पानी की दिक्कत रहेगी। कई वर्षों से जलालाबाद और तालग्राम ब्लाक में पानी के लिए हाहाकार मचा है। भूगर्भ जल स्तर लगातार पाताल की ओर खिसकता जा रहा है। हैंडपंप और सैकड़ों कुएं सूख गए हैं।
तमाम निजी ट्यूबवेल भी ठूंठ बने हैं। जलस्तर कम होने से इन ब्लाकों में बोरिंग करने पर रोक लगा दी है। क्षेत्रीय प्रधान, ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्यों से लेकर किसान संगठनों ने यह समस्या सीएम के सामने रखी तो उन्होंने नहर बनाने की घोषणा की।
सचिव मुख्यमंत्री अनीता सिंह ने अधिशासी अभियंता, डीएम को पत्र भेजकर युद्धस्तर पर नहर बनाने के लिए निर्देश दिए थे। नहर बनाने के लिए सवा सौ हेक्टेयर से ज्यादा जमीन चाहिए, लेकिन इस संबंध में कोई लिखापढ़ी नहीं हुई है।
अपर जिलाधिकारी रमेश चंद्र यादव का कहना है कि अभी तक सिंचाई विभाग ने नई नहर बनाने के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहण संबंधी कोई पत्र नहीं दिया है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि योजना के स्वरूप में बार-बार बदलाव होने से विलंब हुआ है। पहले 244 करोड़ का प्रोजेक्ट बना था, जिसे छोटा कर 177 करोड़ पर लाया गया। मिघौली रजबहा की लंबाई 35 से घटाकर 30 किमी की गई। एक्सईएन जगदीश सिंह का कहना है कि जिला स्तर से कोई देरी नहीं हो रही है। गेंद शासन के पाले में है।
मैनपुरी से निकला निगोह रजबहा किमी 11.200 ब्लाक छिबरामऊ में मिघौली तक आता है। मिघौली गांव के पास इसकी दाहिनी पटरी से मिघौली रजबहा निकला है, जिसकी लंबाई 16 किमी है। इसमें 64 क्यूसेक पानी आता है।
इसी रजबहे की लंबाई बढ़ाकर जलालाबाद व तालग्राम ब्लाक तक लाने की योजना है। मिघौली रजबहे को करीब 30 किमी लंबा किया जाएगा।
इस रजबहे से विभिन्न स्थानों से छह से ज्यादा माइनरें निकाली जाएंगी, जिनकी लंबाई करीब 35 किमी है। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 177 करोड़ रुपये आंकी गई है।
जगदीश सिंह, अधिशासी अभियंता ने कहा जनपद व मुख्य अभियंता (रामगंगा) सिंचाई खंड कानपुर के स्तर से कार्ययोजना संस्तुति सहित शासन को भेज दी गई है। इसे स्वीकृति भी मिल गई है।
बजट अभी नहीं मिला है। प्रमुख अभियंता की देखरेख में गठित कमेटी की बैठक में विचार-विमर्श हो चुका है। व्यय वित्त समिति के सामने भी प्रोजेक्ट पेश हो चुका है। अब इसे नाबार्ड के बजट से बनाने के निर्देश मिले हैं। 15 से 20 दिन के अंदर प्रस्ताव तैयार कर नाबार्ड को भेज दिया जाएगा।