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Kannauj News: विस्फोट के बाद लावारिस कार ने बढ़ाए सवाल

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छिबरामऊ। बहबलपुर में अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोट के बाद फरार तीसरे युवक का चार दिन बाद भी सुराग नहीं लग सका है। पुलिस ने फैक्टरी संचालक शिवकुमार के दोनों बेटों संतोष और महेश को नामजद किया है पर एफआईआर में तीसरे युवक की पहचान सामने नहीं आई है। इसी बीच मंदिर के पास कई दिनों से खड़ी मिली एक लावारिस कार ने मामले की जांच को नया सवाल दे दिया है।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक सफेद रंग की यह कार कई दिनों से मंदिर के पास खड़ी है। गांव में चर्चा है कि कार को एक माह पहले ही लाया गया था। विस्फोट से पहले बारूद और अन्य सामान को इधर-उधर करने में इस कार का इस्तेमाल किया जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि कार का इस घटना से संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस के लिए अब यह पता लगाना भी अहम होगा कि कार यहां किसने और कब खड़ी की। कार का नंबर दिल्ली का है। परिवहन विभाग के रिकार्ड के अनुसार इसका पंजीकरण सात जून 2011 का है। वाहन की फिटनेस छह जून 2026 तक और बीमा नौ अगस्त 2026 तक वैध था, यानी दोनों की अवधि अब समाप्त हो चुकी है। ऐसे में जांच में वाहन की मौजूदा स्थिति और उसके इस्तेमाल की पड़ताल पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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तीसरा युवक कौन, सबसे बड़ा सवाल
विस्फोट के बाद ग्रामीणों ने दावा किया था कि फैक्टरी में चार लोग मौजूद थे। इनमें से गांव के ही शिवकुमार चिक की मौत हो गई थी जबकि तीन लोग मौके से भाग गए थे। पुलिस ने फैक्ट्री संचालक शिवकुमार भुर्जी को गिरफ्तार कर लिया था जबकि फैक्टरी संचालक के दो बेटों को नामजद कर लिया, लेकिन तीसरे का अब तक पता नहीं चल पाया है।

फरार एक आरोपी को पुलिस ने दबोचा : सीओ
सीओ मयंक मिश्रा ने बताया कि विस्फोट के दौरान फरार हुए आतिशबाज शिवकुमार भुर्जी के पुत्र संतोष के हत्थे चढ़ चुका है। एक अन्य आरोपी महेश की तलाश जारी है। विस्फोट से जुड़े सभी साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब लावारिस कार की जानकारी सामने आने के बाद जांच कराई जाएगी जाएगी कि इस पूरे घटनाक्रम से कोई संबंध है या नहीं। वहीं कोतवाल कपिल दुबे के नेतृत्व में रविवार की शाम शिवकुमार भुर्जी के घर का ताला खुलवा कर तलाशी ली गई, लेकिन घर में कुछ भी विस्फोट से संबंधित पुलिस के हत्थे नहीं लगा।
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