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Kannauj News: दो लाख की आबादी को पानी के लिए करना है इंतजार

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कन्नौज। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना जिसका लक्ष्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है यह शहर में सुस्त पड़ती नजर आ रही है। शहर की दो लाख की आबादी आज भी शुद्ध पेयजल की आस लगाए बैठी है। ताज़ा आंकड़ों और विभागीय स्थिति पर गौर करें तो पता चलता है कि बजट की कमी और प्रशासनिक कछुआ चाल ने इस मिशन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। जिले में प्रस्तावित 299 टंकियों में से आधे से अधिक का काम अभी भी अधर में है।
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जिले में ग्रामीणों को दूषित पानी और बीमारियों से निजात दिलाने के लिए सरकार ने 299 टंकियों के निर्माण की मंजूरी दी थी। विभाग 163 टंकियों से आपूर्ति शुरू करने का दावा कर रहा है, वहीं हकीकत यह है कि 136 टंकियां अब भी निर्माण के विभिन्न चरणों में फंसी हुई हैं। इनमें से कई टंकियों का ढांचा तो खड़ा हो गया है, लेकिन पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन देने का काम बंद पड़ा है। इस परियोजना की सुस्ती का सबसे बड़ा कारण धनराशि का समय पर आवंटित न होना बताया जा रहा है।
एक वर्ष से निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त बजट जारी नहीं किया गया है। बजट के अभाव में निर्माण सामग्री की खरीद और मजदूरों का भुगतान प्रभावित हुआ है, जिसके कारण कई ठेकेदारों ने साइट पर काम बंद कर दिया है। अधूरी पड़ी टंकियों के पास रखी निर्माण सामग्री (पाइप और सीमेंट) धूप और बारिश में बर्बाद हो रही है, जिससे सरकारी धन का भी नुकसान हो रहा है। नागरिकों का कहना है कि महीनों पहले गड़्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। इससे आवागमन में भी परेशानी हो रही है, लेकिन पानी का कहीं अता-पता नहीं है।
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दो लाख लोगों की सेहत पर खतरा

शुद्ध पानी का इंतजार कर रही दो लाख की आबादी वर्तमान में हैंडपंपों और अन्य पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर है। शहर के कई इलाकों में भूगर्भ जल की गुणवत्ता मानक के अनुरूप नहीं है। फ्लोराइड और आर्सेनिक की अधिकता वाले क्षेत्रों में लोग मजबूरी में असुरक्षित पानी पी रहे हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नागरिकों का कहना है कि सरकार की योजनाएं कागज पर तो शानदार दिखती हैं, लेकिन प्यास बुझाने के लिए हमें आज भी पानी खरीदना पड़ता है।
दिसंबर तक सभी परियोजनाएं हाेंगी पूरीं
जल निगम के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र कुमार का कहना है कि स्थिति को सुधारने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माणाधीन सभी 136 टंकियों का 50 फीसदी काम पूरा हो चुका है। यह सच है कि धनराशि आवंटन में देरी की वजह से कुछ प्रोजेक्ट्स की गति धीमी हुई है, लेकिन विभाग इसे प्राथमिकता पर ले रहा है। हमारा लक्ष्य है कि दिसंबर तक हर हाल में सभी टंकियों का निर्माण पूरा कर जलापूर्ति शुरू कर दी जाए।
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