विशुनगढ़। सरदामई में हुई चकबंदी में किस कदर अनियमितता बरती गई, इसका एक और मामला तब उजागर हुआ है, जब हाल ही में हुई चकबंदी प्रक्रिया में गायब जमीन के लिए अफसरों के चक्कर काट रहे वृद्ध किसान की सदमे में मौत हो गई। किसान के पुत्र की शिकायत पर एसडीएम ने जांच कर कार्रवाई निर्देश दिए हैं।
ग्राम सरदामई निवासी रामसनेही, राजेश्वर दिवाकर व विश्राम ने साल 1964 में गांव की ही सुदामा पत्नी बालकराम से दो-दो बीघा जमीन का बैनामा कराया था। तबसे यह सभी जमीन पर काबिज हैं। जमीन के आकार पत्र 23 भी तीनों के पास हैं। आरोप है कि कुछ माह पहले गांव में हुई चकबंदी प्रक्रिया इसमें रामसनेही का दो बीघा आठ डिसमिल व विश्राम का दो बीघा छह डिसमिल का चक बना दिया गया, जबकि राजेश्वर की जमीन गायब कर दी गई।
राजेश्वर पिछले छह महीनों से जमीन के लिए चकबंदी विभाग के अफसरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। मंगलवार को राजेश्वर दिवाकर अपने बेटे पंकज के साथ शिकायत लेकर एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी के पास गए थे। यहां वह बेहोश होकर गिर पड़े। पंकज ने बताया कि पिता की तबीयत बिगड़ने पर एसडीएम ने आश्वासन दिया कि पहले पिता का इलाज कराओ, शिकायत की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
पंकज के अलावा उसके भाई राजपाल व उड़नवीर का आरोप है कि जमीन न मिलने के कारण सदमे के कारण घर आते ही पिता राजेश्वर की मौत हो गई। एसडीएम ने बताया कि किसान की मौत किस कारण हुई, इस बारे में जानकारी नहीं है। सरदामई में अभी रिकॉर्ड बन रहा है, किसी की जमीन नहीं गई है।