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अब तक 4808 लोगों की जान ले चुका इबोला

Wed, 19 Nov 2014 05:30 AM IST
Kannauj
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तिर्वा (कन्नौज)। पश्चिमी अफ्रीका के देशों में इबोला वाइरस 12 नवंबर तक 4808 लोगों की जान ले चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे विश्व स्तरीय महामारी घोषित करते हुए सभी देशों से सतर्क रहने की सलाह दी है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि दुश्मन देश इसे जैविक हमले के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह जानकारी राजकीय मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डाक्टरों ने दी। मंगलवार को वह इबोला वाइरस पर आयोजित सेमिनार में व्याख्यान दे रहे थे। सेमिनार के माध्यम से मेडिकल स्टूडेंटस, डाक्टर्स व पैरामेडिकल स्टाफ को इस वायरस से होने वाले संक्रमण से बचाव व प्रारंभिक लक्षणों की जानकारी भी दी गई।
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मेडिकल कालेज प्राचार्य डा.वीएन त्रिपाठी ने कहा कि सबसे पहले वर्ष 1976 में पश्चिमी अफ्रीका के कांगो में पहला मरीज मिला था। वर्ष 2014 के दौरान पश्चिमी अफ्रीका में इसने महामारी का रुप ले लिया। कम्युनिटी मेडिसिन की सहायक प्रो.डाक्टर तनु मिड्ढा ने कहा कि अभी तक भारत में इस बीमारी का एक भी मरीज नहीं पाया गया है। फिर भी विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों के मुताबिक हमारा देश इस बीमारी से बचने के लिए अभी से पूरे उपाय कर रहा है। इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति की 90 फीसदी तक मृत्यु होने की संभावना रहती है। अभी तक इसका एन्टी वायरस नहीं खोजा जा सका है।
पैथोफिजियोलाजी की सहायक प्रो.डा.रोशनी अग्रवाल ने बताया कि इसका वायरस 790 से 1400 नैनो सेंटीमीटर तक लंबा होता है। इसके शुरुआती लक्षण में मरीज को पहले बुखार आता है। एन्टीबायोटिक से बुखार उतरता नहीं है। धीरे-धीरे जोड़ों में दर्द शुरु होता है। इसके बाद शरीर के कई हिस्सों से ब्लडिंग शुरु हो जाती है। जगह-जगह चकत्ते पड़ जाते हैं। मेडिसिन के एचओडी डा.हरीश गुप्ता ने बताया कि अफ्रीका से भारत आने वाले पर्यटकों से इस बीमारी के फैलने का खतरा है। यह बीमारी संक्रमणित व्यक्ति से हाथ मिलाने पर भी फैल जाती है। इस बीमारी से मौत के शिकार हुए लोगों के पोस्टमार्टम के दौरान यह रोग चिकित्सकों को भी लग सकता है। कम्यूनिटी मेडिसन के डा.प्रदीप खारया ने बताया कि इबोला वायरस से विश्व के राष्ट्र सबसे अधिक चिंतित इस बात से है कि दुश्मन देश इसे जैविक हमले के रुप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका टीका अभी तक खोज न पाने के कारण बचाव मुश्किल है। उन्होंने बताया कि भोजन से पूर्व हाथ को अच्छी तरह से धोएं। मीट अच्छी तरह पकने के बाद ही उसका इस्तेमाल करें। इस दौरान प्रभारी सीएमएस डा.दिलीप सिंह, डा.डीएस मारतोलिया, डा.एसके वर्मन, डा.शिवगोविंद मिश्रा, डा.वीरेंद्र कुशवाहा, डा.एसके ध्रुव, डा.रीना संत, डा.डाली रश्तोगी, डा.अंजू यादव के अलावा जिला चिकित्सालय के सीएमएस डा.पीएन यादव, डा.सीपी मिश्रा, एसीएमओ डा.रमेश चंद्रा मौजूद रहे।
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इबोला के मरीजों के लिए अलग वार्ड का गठन
तिर्वा। मेडिकल कालेज में इबोला वायरस से प्रभावित मरीजों के उपचार व सुरक्षा के लिए एक अलग वार्ड का गठन कर दिया गया है। इसमें चार बेड सुरक्षित किए गए हैं। इसके लिए दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती भी कर दी गई है। इबोला व अन्य गंभीर संक्रमित बीमारियों से ग्रसित मरीजों को ही इस वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा.वीएन त्रिपाठी ने सेमिनार के दौरान यह घोषणा की।
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मेडिकल कालेज चला अब गांव की ओर
तिर्वा। राजकीय मेडिकल कालेज के चिकित्सक व छात्र अब गांव में भी जाकर मरीजों का उपचार करेंगे। साथ ही उन्हें रोगों से संबंधित कई जानकारियां, सुझाव व उपाय बताएंगे। सप्ताह में एक दिन ग्रामीण क्षेत्र में एक कैंप आयोजित होगा। प्राचार्य ने बताया कि गांव में कैंप करने के लिए कम्यूनिटी मेडिसन के सहायक प्रो.डा.प्रदीप खार्या व उनकी टीम की तैनाती की गई है। एमबीबीएस तृतीय वर्ष के स्टूडेंटस व दो विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ प्रत्येक बुधवार को टीम क्षेत्र के गांव में कैंप करेगी। वहां मिले गंभीर मरीजों को मेडिकल कालेज में भर्ती कराएगी। यह जानकारी प्राचार्य ने दी।
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