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खाद के लिए दर-दर भटक रहा ‘अन्नदाता’

Mon, 20 Oct 2014 05:32 AM IST
Kannauj
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मानीमऊ (कन्नौज)। का वर्षा जब कृषि सुखाने। रामचरित मानस की यह चौपाई वीवीआईपी जिले के किसानों पर पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। आलू की फसल के लिए जब खाद की सबसे अधिक जरूरत है, तब अन्नदाता खाद के लिए दर-दर भटक रहा है। सहकारी समितियों में रात के अंधेरे में चहेतों को खाद दे जाती है और गरीब किसान ताकते रह जाता है। खाद के लिए आवाज उठाने के बाद भी अफसरों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
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साधन सहकारी समिति उदैतापुर में गुरुवार को दोपहर दो बजे सन्नाटा पसरा था। खाद का अता-पता नहीं था। जो किसान खाद लेने के लिए पहुंच रहे थे, उन्हें जल्द ही खाद आने का रटा-रटाया जवाब देकर टकराया जा रहा था। यह सिलसिला देर शाम तक चला। साधन सहकारी समिति तिखवा, मित्रसेनपुर में भी खाद गायब है। समिति के कर्मचारी यह कहकर खुद का बचाव कर रहे थे कि जब ऊपर से ही खाद नहीं आ रही है तो वे लोग कहां से बांट दें। मियांगंज स्थित इफ्को के खाद विक्रय केंद्र पर इफ्को खाद नदारद है। गुखरू के पूर्व प्रधान व समिति के कई बार अध्यक्ष रहे पूरनलाल दोहरे ने कहा कि खाद संकट अफसरों की देन है। समिति पर जो खाद आती है उसे रात के अंधेरे में बांटा जाता है। किसानों के चेहरे देखकर खाद दी जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब किसान भटकते हैं, जबकि असरदार व चढ़ावा चढ़ाने वाले किसान जरूरत से ज्यादा खाद ले जाते हैं। तिखवा समिति के अध्यक्ष सपा नेता दारोगा कटियार का कहना है कि समितियों पर जानबूझकर इन दिनों खाद भेजने में लेटलतीफी की जा रही है। खाद की कालाबाजारी को सरकारी तंत्र ही बढ़ावा दे रहा है। एडीओ कोआपरेटिव शिवमूर्ति पांडेय कहते हैं कि खाद पर्याप्त मात्रा में है। यदि किसी किसान को खाद नहीं मिल रही है तो विभाग में लिखित शिकायत करे।
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नरायनपुरवा गांव निवासी किसान कृष्ण कुमार कटियार ने बताया कि आलू की बुआई लेट हो रही है। समिति पर खाद उधार मिलती है और अच्छी क्वालिटी की होती है। गरीब किसानों के लिए समिति ही एकमात्र सहारा है। इस साल समितियों ने पर्याप्त खाद वक्त पर मिलने के दावे किए थे, पर ऐसा हुआ नहीं।
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फोटो 31
गांव नरायनपुरवा निवासी किसान वृजेंद्र कटियार का कहना है कि खाद संकट कालाबाजारी करने वालों की देन है। जानबूझकर ऐन मौके पर डीएपी व एनपीके खाद का संकट पैदा किया गया है ताकि निजी दुकानदार मौके का फायदा उठा सकें। जिले के अधिकारी भी खाद संकट के लिए दोषी हैं।
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किसान राजेंद्र कटियार का कहना है कि चेक भी जमा कर चुके हैं पर समिति पर आज-कल में खाद आने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। फसल की बुवाई लेट हो रही है। कई किसानों ने बीज बचाने के लिए मजबूरी में निजी दुकानों से महंगी खाद खरीदकर बुवाई की।
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फोटो 33
गांव मानीमऊ के किसान गिरीश कटियार का कहना है कि खाद की समस्या बेहद विकराल है। सहकारिता विभाग के अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे। ऐसा लगता है निजी दुकानदारों की अफसरों से साठगांठ है। जब सबसे ज्यादा आवश्यकता है तब खाद नहीं मिल पा रही है।

रैक प्वाइंट न होने से आती है दिक्कत
एआर कोआपरेटिव कार्यालय के सहायक विकास अधिकारी संजय तिवारी का कहना है कि रैक प्वाइंट फर्रुखाबाद में होने के कारण खाद की किल्लत पैदा होती है। कन्नौज को शासन से जितनी खाद का आवंटन प्राप्त होता है, उसमें से आधी खाद फर्रुखाबाद में चली जाती है। रैक प्वाइंट यदि कन्नौज में बन जाए तो मांग के अनुसार पूरी खाद मिलने लगेगी। ऐसा होने पर खाद का पर्याप्त स्टाक रहेगा।

कोट
बोले जिम्मेदार
सहकारी समितियों में खाद की समस्या की जानकारी मिली है। सहकारिता विभाग के अफसरों से वार्ता करेंगे। खाद का इंतजाम कराकर उसे किसानों में बंटवाने के लिए जल्द प्रयास तेज करेंगे। यदि कहीं पर सचिव जानबूझकर खाद की किल्लत पैदा किए हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी। -रमेश चंद्र यादव, अपर जिलाधिकारी
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छिबरामऊ में स्टाक हो गया निल
छिबरामऊ। किसान सेवा सहकारी समिति पूर्वी पर स्टाक निल होने के चलते शुक्रवार को किसान खाद के लिए भटकते रहे थे। समिति के अधिकारियों का कहना है डीएपी, एनपीके और यूरिया की एक-एक हजार बोरी की डिमांड भेज दी गई है। खाद प्राप्त होते ही वितरण करा दिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष महावीर सिंह यादव ने बताया कि जल्द खाद का स्टाक प्राप्त हो जाएगा। किसान सेवा सहकारी समिति पूर्वी के प्रभारी प्रबंध निदेशक ब्रजेश यादव ने बताया पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खाद की खपत दोगुनी बढ़ी है। बीते साल लगभग 83 लाख रुपये का ऋण वितरण हुआ था। इस वर्ष 30 सितंबर तक 455 समिति के सदस्यों के बीच लगभग एक करोड़ 21 लाख 40 हजार रुपये और एक अक्तूबर से अभी तक लगभग 35 लाख रुपये की खाद ऋण के रूप में दी जा चुकी है।
इनसेट
बिना केसीसी के नहीं होगा लेनदेन
छिबरामऊ। सहकारी समिति में पहले कोआपरेटिव बैंक से जारी होने वाली पासबुक से लेनदेन होता था, लेकिन नए शासनादेश के तहत अब समिति के सक्रिय सदस्यों को केसीसी बनवानी पड़ेगी। तभी वह समिति से खाद का लेनदेन कर सकता है। प्रभारी प्रबंध निदेशक ने बताया केसीसी बनवाने के लिए समिति के सदस्य को खसरा, खतौनी, वोटर आईडी, राशनकार्ड की फोटो कापी, स्वयं की नौ फोटो और दो गारंटर की जरूरत होती है। गारंटर को भी दो-दो फोटो और दो-दो वोटर आईडी कार्ड जमा करनी होती है।
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