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एड्स से जूझ रहे जिले के 54 लोग

Sat, 18 May 2013 05:30 AM IST
Kannauj
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कन्नौज। एचआईवी (एड्स) की बीमारी कन्नौज में भी पैर पसार चुकी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 54 लोग इस जानलेवा बीमारी से जूझ रहे हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। इस साल अब तक दस मरीजों की पहचान हो चुकी है।
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जिला अस्पताल में हुई जांच में वर्ष 2011 से अब तक 54 लोगों को एड्स की पुष्टि हो चुकी है। वर्ष 2011 में 24, वर्ष 2012 में 20 और वर्ष 2013 में अब तक 10 एचआईवी पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। गर्भवती महिलाओं की जांच के दौरान एचआईवी पाए जाने पर उन्हें दवाएं दी जाती हैं ताकि बच्चे को एचआईवी से बचाया जा सके। एचआईवी टेस्ट की सुविधा जिला अस्पताल में उपलब्ध है। तीन किटों के माध्यम से अलग-अलग जांचें की जाती हैं। पुष्टि होने के बाद ही दवा की शुरुआत की जाती है। एड्स के इलाज के लिए मरीजों को कानपुर के लिए रेफर किया जाता है। कुछ मरीजों को एआरटी की दवा जिला अस्पताल में भी उपलब्ध कराई जाती है। जिला चिकित्सालय में खुले सेंटर के जरिये प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है। अब लोग स्वेच्छा से भी अपनी जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं। एडस पीड़ित की पहचान गोपनीय रखी जाती है। पीड़ितों के प्रति चिकित्सीय स्टाफ बेहतर ढंग से पेश आने के साथ ही उन्हें सही सलाह भी देता है। कन्नौज में एलआईजा टेस्ट की किट उपलब्ध नहीं है। एआरटी, नेब्रापीन सीरप व टेबलेट उपलब्ध हैं। पूरे जिले में सिर्फ जिला अस्पताल में दूसरी मंजिल पर स्थित पैथालाजी सेंटर में जांच की जाती है। एड्स की दवा और जांच से लेकर सारी सुविधाएं मुफ्त दी जाती हैं।
बीमारी न बताने पर गई तीन जानें
कन्नौज। एड्स की बीमारी छुपाने से तीन जानें चली गईं। अब पीड़ित दंपति कानपुर में उपचार करा रहा है। जिला चिकित्सालय से मिली जानकारी के मुताबिक एक युवक को एड्स की बीमारी थी। उसने किसी को इस बारे में नहीं बताया। वर्ष 2008 में उसकी शादी हो गई। शादी के बाद उसकी पत्नी भी एड्स की चपेट में आ गई। जब महिला गर्भवती हुई तो मेडिकल जांच के दौरान पता चला कि वह एचआईवी पाजिटिव है। बाद में बच्चे की जान चली गई। कुछ दिन बाद युवक भी दुनिया से चल बसा। पति की मौत के बाद युवती ने वर्ष 2009 में दूसरी शादी कर ली, लेकिन उसने किसी को नहीं बताया कि वह एड्स की बीमारी से ग्रसित है। महिला के जरिये उसके दूसरे पति को भी एड्स हो गया। बच्चा हुआ तो उसकी भी मौत हो गई। इस पर महिला ने पूरे मामले की जानकारी दूसरे पति को दी। दोनों ने जागरूकता का परिचय देते हुए इलाज शुरू कराया। इस समय दोनों का कानपुर से उपचार चल रहा है। दंपति का कहना है कि गलती की वजह से उनके साथ जो हुआ, जागरूकता से उसकी पुनरावृत्ति रुक सकती है। बीमारी की आशंका होने पर तत्काल जांच कराएं। संबंधित अस्पतालों में पहुंचकर समय पर बेहतर उपचार लें। बीमारी छुपाने से समस्या का समाधान नहीं निकलता है।
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