सौ शैय्या अस्पताल में पीड़ित बच्चे, मोनिका, राखी, मोहिनी, खुशबू व अरुणा।
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क्षेत्र के ग्राम निगोह खास की दलित बस्ती में मंगलवार को स्वास्थ्यकर्मियों की ओर से फाइलेरिया दवा बांटी गई थी। बुधवार को दवा खाने से सात बच्चों की हालत बिगड़ गई। सभी बच्चों को सौ शैय्या अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के बाद बच्चों की हालत में सुधार हो सका।
ग्राम निगोह खास के ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार की शाम दवा खाने से गांव के वीरेंद्र के पुत्र बलराम (8), रजित (10), मोनिका (7) व राखी (8), मोहिनी (8), खुशबू (6), अरुणा (7) की हालत बिगड़ गई। इन सभी बच्चों को उल्टी आने के बाद अचानक चक्कर आने लगे और बच्चे बेहोश होकर गिर पड़े। यह देख उनके परिजनों में चीखपुकार मच गई।
कुछ ही देर में ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। इस बीच इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को दी गई। सूचना पर पहुंची एंबुलेंस से सभी बच्चों को सौ शैय्या अस्पताल ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी हालत में सुधार हो सका। चिकित्सकों के मुताबिक फाइलेरिया की दवा गर्म होती है। इस दवा को खाली पेट नहीं खाना चाहिए।
खाली पेट खाने से आमतौर पर चक्कर व उल्टी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.कृष्णस्वरूप ने बताया कि नेशनल हेल्थ प्रोग्राम के तहत 2022 तक फायलेरिया के उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसमें 2 साल से ऊपर के सभी बच्चों और बुजुर्गों को साल में 2 बार दवा खिलाई जाएगी, जिसके अंदर फायलेरिया के कीटाणु मौजूद होंगे, उसे उल्टी व चक्कर आना स्वाभाविक है। कोई दिक्कत के बात नहीं है, इस दवा से किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं है। गांवों में विश्व स्वास्थ संगठन से प्रमाणित दवा का वितरण कराया जा रहा है।