कन्नौज। मार्च में जिले के अंदर 244 बच्चे सैम (अतिकुपोषित) और मैम (कुपोषित) श्रेणी के निकले हैं। जिला अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) वार्ड में 12 बच्चों को ही भर्ती कराया जा सका है। गंभीर कमजोर बच्चों का दो सप्ताह तक वार्ड में रुकना जरूरी होता है।
दरअसल, पहली मार्च से 31 तारीख तक पांच साल तक के बच्चों का वजन और स्वास्थ्य परीक्षण हुआ था। उसमें सैम श्रेणी के 17 और मैम श्रेणी में 227 बच्चे निकले थे। अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी वार्ड में भर्ती कराने पर खास जोर रहता है। कुपोषित बच्चे भी यहां भर्ती होते हैं। उनको समय पर निर्धारित खान-पान दिया जाता है। साथ ही देखरेख होती है। स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दे दी जाती है। बच्चे के साथ में मां को भी रहना पड़ता है, जिससे बच्चे को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश वर्मा ने बताया कि अभिभावक अपने बच्चों को एनआरसी वार्ड में रखना नहीं चाहते हैं। या एक-दो दिन ही रखने के बाद ले जाते हैं। अभिभावकों को समझाया जाता है। कभी त्योहार या आलू की खोदाई का हवाला देते हुए चले जाते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर वजन कर कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को तलाश कर जिला अस्पताल भेजा जाता है।
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ब्लॉकवार ढूंढे गए बच्चों का ब्योरा
ब्लॉक सैम बच्चे मैम बच्चे
छिबरामऊ 01 02
सौरिख 00 32
जलालाबाद 02 07
उमर्दा 05 87
हसेरन 03 22
कन्नौज ग्रामीण 02 35
कन्नौज नगर 04 32
तालग्राम 00 09
गुगरापुर 00 03