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मेडिकल कालेज के चार और डाक्टरों का इस्तीफा

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अमर उजाला ब्यूरो
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तिर्वा। मेडिकल कालेज में उपस्थिति को लेकर बरती गई सख्ती डाक्टरों का रास नहीं आ रही है। शुक्रवार को फैकल्टी के चार और डाक्टरों ने प्राचार्य को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मार्च से लेकर अभी तक 21 डाक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। जबकि 49 डाक्टर बिना किसी सूचना के अनुपस्थित चल रहे हैं। मेडिकल कालेज में तेजी से कम होते डाक्टर का असर अब मरीजों पर पड़ने लगा है। रोजाना 12 सौ से 15 सौ मरीजों के इलाज का बोझ अब 95 डाक्टरों के कंधों पर आ गया है।

मार्च में मेडिकल कालेज में 110 फैकल्टी और 65 जूनियर और सीनियर मिलाकर कुल 175 डाक्टर थे। पांच माह बाद इनकी घटकर 95 हो गई है। इनमें 40 फैकल्टी और 55 जूनियर व सीनियर डाक्टर हैं। डाक्टरों की कम होती संख्या के पीछे उपस्थिति को लेकर बरती गई सख्ती को जिम्मेदार बताया जा रहा है। मेडिकल कालेज सूत्रों की माने तो डाक्टर सप्ताह में दो से तीन दिन ही आने पर राजी थी, जबकि शासन से इनकी रोजाना उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
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उधर, मेडिकल कालेज में चिकित्सकों की कम होती संख्या का असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। रोजाना करीब 12 सौ से 15 सौ मरीजों की ओपीडी मेडिकल कालेज में होती है। अब स्थिति ये है कि मरीजों को भर्ती करने में भी आनाकानी की जा रही है
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मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. डीएस मारतोलिया ने बताया कि मेडिसिन विभाग में तैनात सहायक प्रोफेसर डा. राकेश शाही ने इस्तीफा दे दिया है। डा. शाही पिछले दो सालों से कन्नौज मेडिकल कालेज में थे, पर उन्होंने अपना संबंद्धीकरण गोरखपुर मेडिकल कालेज करा रखा था। उन्होंने जब डीजीएमई से संबद्धीकरण खत्म करने को कहा तो नाराज होकर उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके अलावा सर्जरी विभाग में तैनात सहायक प्रोफेसर डा. आई एन बाजपेयी व सर्जरी में तैनात सहायक प्रोफेसर डा. सोनल सचदेवा, पैथोलॉजी में सहायक आचार्य पद पर तैनात डा. मीरा माथुर ने भी अपना इस्तीफा भेज दिया है। इन चार डाक्टरों के इस्तीफे के बाद राजकीय मेडिकल कालेज की फैकल्टी में अब महज 40 चिकित्सा शिक्षक रह गए हैं। फैकल्टी में शिक्षकों की कमी के चलते प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक को पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है। उनसे जल्द ही फैकल्टी चिकित्सकों की तैनाती की मांग की गई है।

मेडिकल कालेज के चार और डाक्टरों का इस्तीफा

- मार्च में थे 165, अब बचे 95,
- उपस्थिति को लेकर बरती गई सख्ती का दिखा असर
- चारों डाक्टरों की फैकल्टी में थी तैनाती
- फैकल्टी में रह गए सिर्फ 40 चिकित्सा शिक्षक
- मरीजों के इलाज पर पड़ेगा असर
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