अमर उजाला ब्यूरो
तिर्वा (कन्नौज)। राजकीय मेडिकल कालेज में अगले सप्ताह से अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों के समक्ष दिक्कतें आने वाली हैं। मेडिकल कालेज के रेडियालॉजी विभाग में तैनात चार चिकित्सकों में से तीन के पास रेडियोलॉजी की पीजी डिग्री नहीं है। महज एक चिकित्सक ही पीजी डिग्री होल्डर है। यह चिकित्सक संविदा पर तैनात है। शासन के निर्देश पर पीजी डिग्री न होने की वजह से इस विभाग के तीन चिकित्सकों को हटा दिया गया है। अब अल्ट्रासाउंड का दायित्व महज एक ही चिकित्सक पर सोमवार से रहेगा। इस वजह से मरीजाें को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. डीएस मारतोलिया ने बताया कि पिछले सप्ताह शासन से निर्देश आया था कि अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन व एमआरआई सिर्फ रेडियोलॉजी में पीजी डिग्रीधारी डॉक्टर ही कर सकेंगे। छह माह व एक साल के डिप्लोमा होल्डर एमबीबीएस डाक्टर अल्ट्रासाउंड नहीं करेंगे। प्राचार्य के मुताबिक रेडियोलाजी सेक्शन में अभी तक चार डाक्टर तैनात थे। इनमें सिर्फ एक चिकित्सक के पास ही एमबीबीएस के बाद दो वर्षीय पीजी डिग्री की योग्यता थी। शेष तीन चिकित्सकों ने एमबीबीएस करने के बाद डिप्लोमा कोर्स किया था।
शासन के निर्देशों के बाद इन तीन चिकित्सकों की संविदा समाप्त कर दी गई है। अब महज एक ही डाक्टर है। इस वजह से अगले सप्ताह से प्रतिदिन अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन व एमआरआई होना संभव नहीं हो पाएगा।
पूरे प्रदेश में रेडियोलाजी डिग्री धारी डाक्टरों की कमीं है। प्राइवेट चिकित्सालयों में रेडियोलाजी डिग्री होल्डर को दो लाख से ढाई लाख तक का वेतन मिल रहा है। इसकी अपेक्षाकृत मेडिकल कालेज में महज 70 हजार रुपये प्रति माह दिया जाता है। इस वजह से बाहर से कोई डाक्टर मेडिकल कालेज में आने को तैयार नहीं है।
सोमवार से बायोमीट्रिक हाजिरी
एमसीआई के निर्देश पर शनिवार को मेडिकल कालेज के सभी विभागों में डाक्टरों की हाजिरी को सुनिश्चित करने के लिए आठ स्थानों पर बायोमीट्रिक सिस्टम चालू कर दिया गया है। सोमवार से इसी सिस्टम के जरिए जूनियर व सीनियर चिकित्सकों के अलावा चिकित्सा शिक्षकों की हाजिरी लगेगी। एक जुलाई से प्रतिदिन की रिपोर्ट एमसीआई व प्रदेश शासन को भेजी जाएगी। सीएमएस डा. दिलीप सिंह के मुताबिक बायोमीट्रिक में दो सिस्टम, ओपीडी में , दो शैक्षणिक भवन में, एक प्राचार्य कक्ष में, सीएमएस कार्यालय में एक सिस्टम व एक सिस्टम जनरल वार्ड में व एक सिस्टम इमरजेंसी वार्ड में लगाए गए हैं। सभी सिस्टमाें की सुरक्षा-व्यवस्था निजी सुरक्षा कर्मियों के हवाले की गई है। सीएमएस के मुताबिक एक सिस्टम की कीमत करीब 70 हजार रुपये है। सिस्टम खराब होने पर एमसीआई को इसका मुआवजा देना होगा।
मेडिकल कालेज में अब अल्ट्रासाउंड के लिए हाेंगी दिक्कते
- शासन नेे सिर्फ रेडियोलाजी में पीजी डिग्रीधारी डाक्टराें को ही अल्ट्रासाउंड करने का जारी किया था फरमान