कन्नौज। केंद्र सरकार की ओर से उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 29 जून 2020 को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना लागू की गई। जिले में इसकी शुरूआत सितंबर 2022 में हो सकी। दो वर्ष तक यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। हालांकि अब तक योजना के तहत 164 लाभार्थियों को 12.65 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण देकर उद्योगों को बढ़ावा दिया गया। साथ ही लाभार्थियों काे 4.40 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है।
उद्यान विभाग द्वारा संचालित इस योजना में लाभार्थी को अधिकतम 10 लाख या पूंजीगत राशि की 35 प्रतिशत धनराशि सब्सिडी के तौर पर दी जाती है। योजना में नया उद्योग शुरू करने व अपने उद्योग को विस्तार देने वाले लोगों द्वारा आवेदन कर ऋण प्राप्त किया जा सकता है। जिले में योजना के तहत स्थापित इकाइयों में सर्वाधिक 103 इकाइयां गेहूं उत्पाद से जुड़ी हैं, जबकि चना उत्पाद से संबंधित 18 इकाइयां संचालित हो रही हैं। इसके अलावा ऑयल आधारित उद्योगों की 25, चावल उद्योग की सात, गुलाब उद्योग की चार, मसाला व वनाधारित उद्योग की छह-छह, सब्जी व दूध उत्पादों से जुड़ी तीन-तीन, सरसों तेल व नमकीन उद्योग की इकाई संचालित हो रही है। डीआरपी शिवम त्रिपाठी का कहना है कि वर्ष 2022 में जब जिले में आया तो योजना की प्रगति शून्य थी। कई कारोबारियों से संपर्क किया, उन्हें अपने उद्योगों को बढ़ाने व नए उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। तीन वर्ष की मेहनत के बाद नतीजा अच्छा मिला, इससे संतुष्ट हैं। उन्होंने बताया कि योजना की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा सकती है। उद्योगों को गति प्रदान करने के अलावा किसान, बेरोजगारों के लिए योजना संजीवनी से कम नहीं है। इसके बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।
योजना से व्यापार बढ़ाने में मिली मदद
नगर के मोहल्ला होली निवासी विकास पांडेय व मनीष पांडेय की फर्म वर्ष 1901 से स्थापित है। यह गुलाब जल, केवड़ा जल, बेला जल (मोतिया इत्र) व फूलों का इत्र प्राकृतिक विधि से बनाते हैं। देश विदेश की कई मल्टी नेशनल कंपनियों के साथ व्यापार करते हैं। वर्ष 2023 में व्यापार को विस्तार दिया। आज इनकी फर्म का टर्न ओवर 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष से भी अधिक है।
इन इंडस्ट्रीज में रहती मांग
मनीष पांडेय ने बताया कि खाद्य, कास्मेटिक व आयुर्वेद इंडस्ट्री में इन उत्पादों की मांग सर्वाधिक रहती है। शरबत, ठंडाई, मिठाई, आइसक्रीम सहित अनेक खाद्य पदार्थों में गुलाब, बेला, केवड़ा की खुशबू की मांग रहती है। इसके अलावा आयुर्वेद दवाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
जनवरी से अप्रैल तक बनाते गुलकंद
विकास पांडेय ने बताया कि गुलाब का फूल जनवरी से अप्रैल तक अच्छी गुणवत्ता का रहता है, इसलिए इन्हीं तीन-चार माह में गुलकंद तैयार कर लेते हैं। गुलकंद गुलाब की पंखुड़ियों व चीनी या मिश्री का मिश्रण प्राकृतिक तरीके से तैयार कर बनाया जाता है।
-
वर्षवार आंकड़ा:
वर्ष लाभार्थियों की संख्या पूंजीगत लागत दी गई सब्सिडी
अगस्त 2022 से अगस्त 2023 तक - 35 2,55,24,461 9,0,23,101
सितम्बर 2023 से अगस्त 2024 तक - 39 2,90,08,384 1,01,09,852
सितम्बर 2024 से अगस्त 2025 तक - 90 7,19,83,783 2,48,58,466
-