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बिजली दलालों से मिलकर विभाग को लगाया लाखों का चूना

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कन्नौज। निजी नलकूप स्वामियों ने बिजली दलालों से मिल कर कनेक्शन लेने के लिए पोल की दूरी कम दिखा अधिक पोल लगवाकर लाइनें बिछवा लीं। इससे विभाग को लाखों रुपये की चपत लगी। दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी ने मामले की जांच कराई तो कई लोग पहली जांच में ही फंसते नजर आए। मामले की रिपोर्ट संबंधित जांच अधिकारी ने एमडी को भेजी है।
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दलालों ने बड़े पैमाने पर बिजली विभाग को चपत लगाई है। नलकूप का कनेक्शन लेने वाले किसानों से मिलकर कम पोल की लाइन का इस्टीमेट तैयार करा दिया। इसी के अनुसार धनराशि जमा करा कर लाइन बना दी। कई गांवों में दलालों ने नया खेल खेला। इस्टीमेट तो सात पोल का पास कराया पर 10 पोल लगाकर लाइन बना कर कनेक्शन जोड़ दिया। विभाग को सात पोल की धनराशि ही जमा की। बाकी की धनराशि किसान से दलाल ने खुद ले ली। किसानों से सरकारी दर से कम धनराशि लेकर पोल लगाकर लाइन बनाई गई है। इसकी जानकारी पर दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के एमडी एसके वर्मा ने बिजली विभाग के एक अधिकारी को जांच के लिए लगा दिया। अधिकारी ने कुछ ही निजी नलकूपों के कनेक्शन की जांच में पाया कि दलालों ने कई स्थानों पर इस्टीमेट से अधिक पोल की लाइन बना कर नलकूप को चालू करा दिया। इस तरह की कई लाइनें बनाई गई हैं। जहां पर अधिकारी जांच करने पहुंच रहे, खामी मिल रही हैं। अब जांच के बाद संबंधित किसानों से बकाया धनराशि की वसूली तो होगी ही, रिपोर्ट भी दर्ज कराई जा सकती है।


पेटी ठेकेदार कर रहे खेल
कई बड़ी फर्मों ने जिले में सौभाग्य योजना के तहत गांव में लाइन बना कर विद्युतीकरण का ठेका लिया है। फर्म ने पेटी डीलरों को कुछ गांव दिए हैं। फर्म पोल से लेकर तार व अन्य उपकरण मुहैया करा रही है। पेटी डीलर किसानों से बात कर कम कीमत लेकर इस्टीमेट से अधिक पोल लगाकर लाइन बना कर निजी नलकूप के कनेक्शन दे रहे हैं।
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सौभाग्य योजना के पोल निजी नलकूप पर लगाए
गांव को विद्युतीकृत करने के लिए सौभाग्य योजना खुदे बिजली के पोल जिले में भेजे गए हैं। यह पोल उन गांव में ही लगाने के निर्देश हैं जहां सौभाग्य योजना के तहत काम किया जा रहा है। जिला मुख्यालय के निकट एक निजी नलकूप पर पेटी डीलरों ने लाइन बनाते समय सौभाग्य योजना के पोल लगाकर लाइन बना दी।

लाइन का नक्शा बनाने मौके पर नहीं जाते जेई
नियमों के मुताबिक किसी को कनेक्शन देने से पहले लाइन का नक्शा बनाया जाता है। यह नक्शा विभागीय अवर अभियंता व लाइनमैन की देखरेख में तैयार होता है। दोनों के हस्ताक्षर होने के बाद लाइन बनाने की अनुमति दी जाती है। यहां तो जेई मौके पर जाते ही नहीं। दलाल किसी तरह लाइन का नक्शा बनवा कर पास करा लेते हैं। यही कारण है कि दूरी अधिक होने के बाद भी लाइन का इस्टीमेट कम पोल का बना कर पास करा लिया जाता है। दलाल इस काम को कम दाम में करा कर विभाग को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाते हैं।


निजी नलकूप का कनेक्शन लेने में जिन किसानों ने इस तरह का खेल खेला है, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद बकाया धनराशि वसूल की जाएगी।
-शादाब अहमद, एक्सईएन, कन्नौज।

दलालों से मिलकर विभाग को लगाया लाखों का चूना
इस्टीमेट में कम पोल दिखाए और लगवा लिए ज्यादा, लाइनें भी लंबी दूरी की बिछवाईं, निरीक्षण में बिजली अधिकारी को मिल रहीं खामियां, जांच रिपोर्ट एमडी को भेजी, होगी निजी नलकूप स्वामियों पर कार्रवाई
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