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1.30 लाख बच्चों को नहीं मिले जूते-मोजे

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प्राथमिक विद्यालय रोहली का भवन। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को ठंड में बिना जूते-मोजों के स्कूल, मोहल्ला कक्षाओं में जाना पड़ रहा है। इससे बच्चे ठिठुरने के लिए मजबूर हैं। इन्हें सर्दी से पहले जूते व दो जोड़ी मोजे मिलने थे। विभागीय लापरवाही से जिले के 1653 विद्यालयों में पंजीकृत 1.30 लाख बच्चों को अभी तक जूते-मोजे नहीं मिले हैं। अभी भी जल्द मिलने की उम्मीद नहीं है।
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शासन ने सर्दी से पहले छात्र-छात्राओं को स्वेटर के साथ जूते-मोजे देने का प्रावधान किया था। स्वेटर का वितरण हो रहा है। अभी तक जूते-मोजे नहीं बंट सके। विभाग को अभी मांग के अनुरूप जूतों की आपूर्ति नहीं हो पाई है। इस कारण वितरण नहीं हो सका। जूतों के सैंपलों की जांच भी नहीं हो सकी है। इनकी आपूर्ति चयनित फर्म को करनी है। वहीं जानकारों के मुताबिक शासन की ओर से जूतों के लिए टेंडर जारी करने में देरी हुई है। विभाग पर जूतों की लागत कम करने का दबाव था। जूते-मोजों का वितरण कार्यक्र्रम तय न होने की वजह से भी अटका रहा। बताया जा रहा है एक जोड़ी जूता 87 रुपये में व दो जोड़ी मोजे 12 रुपये में देना तय हुआ था।
इस बाबत बीईओ अरविंद कुशवाहा ने बताया कि छात्रों को वितरण के लिए जूते-मोजे के सैंपल आ गए हैं। सैंपल पास होते ही आपूर्ति मंगवाकर बच्चों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उन्हें सर्दी में परेशान नहीं होना पड़ेगा।
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उमर्दा ब्लाक में 34622 छात्रों को नहीं मिल सके जूते-मोजे
तिर्वा। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को शीतलहर से बचाने के लिए स्वेटर के साथ जूते-मोजों का भी वितरण किया जाता है। कोरोना संक्रमण के दौरान विद्यालय बंद होने के बाद से सरकारी योजनाओं में अनदेखी हो रही है। उमर्दा ब्लाक के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों में करीब 28,862 व जूनियर स्कूलों में 5,760 छात्र पंजीकरण हैं। शीतलहर के बाद भी छात्रों को अभी तक जूते मोजे नहीं मिल पाए हैं।
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