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एश डेम को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार

Tue, 13 Feb 2018 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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dam, jhansi news - फोटो : demo
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पारीछा थर्मल पावर प्लांट के नए एश (राख) डैम बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी में फंस गया है। इससे सेंट्रल पावर फाइनेंस कारपोरेशन से 195 करोड़ का कर्ज मिलने के बाद भी उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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वर्तमान में पारीछा थर्मल पावर में 110 मेगावाट की दो, 210 मेगावाट की दो व 250 मेगावाट की दो इकाइयों से उत्पादन हो रहा है। शुरुआत में थर्मल पावर प्लांट के अंदर 110- 110 मेगवाट की दो इकाइयों से उत्पादन शुरू हुआ था। उस समय एश (राख) को एकत्रित करने के लिए 110 मेगावाट का डैम बेतवा नहर के किनारे बनाया गया था। इसी तरह 210- 210 मेगावाट की नई इकाइयों से उत्पादन शुरू होने पर 210 मेगावाट क्षमता का एश डैम तैयार कर लिया गया। लेकिन, साढ़े तीन साल पहले तैयार हुईं 250-250 मेगावाट की नई इकाइयों से निकलने वाली राख के निस्तारण के लिए अभी तक कोई विकल्प तैयार नहीं किया गया है। इस कारण सभी एश डैम में क्षमता से अधिक राख भर चुकी है।

इस कारण पारीछा थर्मल पावर प्लांट प्रबंधन द्वारा अगले बीस से पच्चीस साल तक कोई परेशानी न हो, इस बात का ध्यान रखकर नए एश डैम बनाने के लिए 572 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जानी है। योजना के तहत थर्मल पावर हाउस के निकट स्थित ग्राम गुलारा, महेबा व मुराटा में इसके लिए जमीन अधिग्रहीत की जाएगी। इसके लिए सेंट्रल पावर फाइनेंस कारपोरेशन ने 195 करोड़ का ऋण भी पारीछा थर्मल पावर प्लांट को दे दिया है। मगर, प्लांट प्रशासन ने कर्ज मिलने के बाद पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए आवेदन किया। इस कारण मामला अब पर्यावरण मंत्रालय के पास पहुंच गया। फिलहाल इससे भूमि अधिग्रहण के काम पर ब्रेक लग गया है।
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‘नए एश डैम बनाने की अभी तुरंत ही आवश्यकता नहीं है। नए एश डैम बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण होना है, जिसके लिए 195 करोड़ कर्ज मिल गया है। पर्यावरण की मंजूरी के बाद ही अधिग्रहण का काम होगा। इस काम में वक्त लग सकता है।’
ओपी वर्मा
मुख्य महाप्रबंधक, पारीछा थर्मल पावर प्लांट

प्रतिदिन निकलती है 14 हजार मीट्रिक टन राख
प्लांट में सभी इकाइयों से पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन लेने के लिए चौबीस घंटे में सोलह हजार मीट्रिक टन कोयले की आवश्यकता पड़ती है। यानी, मालगाड़ी के साढ़े चार रैक (एक रैक में औसतन 65 वैगन होते हैं) कोयला प्रतिदिन चाहिए। उत्पादन के बाद चौदह हजार मीट्रिक टन एश प्रतिदिन पानी के घोल के रूम में डैम तक पहुंचाई जाती है। पूर्व में प्रबंध तंत्र ने योजना बनाई थी कि इन नई इकाइयों से जो राख निकलेगी, उसमें से अस्सी प्रतिशत सीमेंट फैक्ट्रियों को बेच दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। राख खरीदने को कोई फर्म सामने नहीं आई।
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