जैन तीर्थ करगुवां जी में 14 से 25 मई तक चलने वाले युग प्रतिक्रमण-यति सम्मेलन महामहोत्सव में समवसरण विधान भी होगा। इस विधान में श्रद्धालुओं को राजीव जैन, सुनील मोदी व जवाहर लाल सिंघई को भरत चक्रवर्ती, यज्ञनायक और सौधर्म इंद्र बनने का अवसर मिला है, जिसे वह अपना सौभाग्य मान रहे हैं।
महोत्सव में गणाचार्य विराग सागर और देश के लगभग 200 दिगंबर जैन मुनि आएंगे, जिनके सानिध्य में देश भर से आने वाले श्रद्धालु समवसरण विधान पूजा-अनुष्ठान और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। विधान के इन पात्रों का दायित्व निभा रहे लोगों से अमर उजाला ने बातचीत की। जिन्होंने कहा कि यह समय उनके परिवार के लिए हमेशा यादगार और विशेष रहेगा।
आत्मिक अनुभूति मिल रही है
यति सम्मेलन देश का बड़ा धार्मिक आयोजन है। इसमें भरत चक्रवर्ती जो छह खंडों के राजाओं के अधिपति थे, बनना विशेष आत्मिक अनुभूति प्रदान कर रहा है। कहा जाए तो पूरे परिवार को गर्व हो रहा है।
राजीव जैन-अंजलि जैन
गुरु सेवा का मौका मिला
गुरु सेवा करने और विधान अनुष्ठान का यज्ञ नायक-यज्ञ नायिका बनना पूरा परिवार का सौभाग्य है। यज्ञ नायक अनुष्ठान का रक्षक होता है।
सुनील मोदी-सीमा
बहुत अच्छा लग रहा है
सौधर्म इंद्र और सचि इंद्राणी बनकर बहुत अच्छा लग रहा है। विधान में सभी श्रद्धालु व इंद्र इनकी अगुवाई में भी पूजा करते है। यह जिम्मेदारी मिलना समाज में सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
जवाहर लाल सिंघई-सुषमा