झांसी। नगर निगम में अफसरों की मनमानी रोकने के लिए महापौर ने सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने पास होने के लिए आईं टेंडर की करीब आधा दर्जन फाइलों को वापस लौटा दिया है। सभी फाइलों पर स्थलीय निरीक्षण कराने का नोट लिखा है। महापौर के सख्त रवैये से जनकार्य विभाग में हड़कंप है।
निर्माण कार्यों में हो रही धांधली की शिकायतें आए दिन नगर निगम में आ रहीं थीं। सबसे ज्यादा खेल स्टीमेट रिवाइज में हो रहा है। अधिकांश कार्यों में तय रेट से अधिक का काम दिखा कर पास कराया जा रहा है। पिछले दिनों एक पुलिया के निर्माण का कार्य पास स्टीमेट से दोगुने पर होना दिखा कर उसके रेट रिवाइज किए गए और उसे पास करा लिया गया।
वहीं, कई काम तो ऐसे भी हो गए जहां पहले से काम हो चुका था और फिर से काम होना दर्शाया गया। पार्षदों और आम लोगों से मिली इस तरह की जानकारी के बाद महापौर किरन राजू बुकसेलर ने टेंडरों को गंभीरता से लेने का फैसला लिया है। अब तक फाइल टेबल पर आते ही उस पर हस्ताक्षर करने वालीं महापौर ने शुक्रवार को आधा दर्जन से अधिक टेंडर फाइलें वापस कर दीं।
सभी फाइलों पर उन्होंने निरीक्षण कराने के लिए नोट लिखा है। महापौर का कहना है कि जन कार्य विभाग के अधिकारी अपनी मनमर्जी से काम कराकर धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। जिस क्षेत्र में काम होना है, वहां के पार्षद व लोगों के साथ वह निरीक्षण करेंगी और टेंडर के स्टीमेट को अनुकूल पाए जाने पर ही उसे पास करेंगी।
उजागर हुई अंधेरगर्दी
महापौर के सख्त रवैये से जन कार्य विभाग की अंधेरगर्दी भी उजागर हो गई। महापौर के पास आईं फाइलों के बीच में एक फाइल वर्ष 2013 की बनी भेज दी गई। संभवत: यह ऐसे कार्य की फाइल होगी, जहां कार्य हो चुका होगा और उसे चुपचाप पास कराने की योजना होगी। फाइल देखते ही महापौर का माथा ठनका और उन्होंने उस पर नोट लगाया कि फाइल दो साल बाद लाने का कारण स्पष्ट करें।