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विश्व श्रवण दिवस : पांच साल में तीन गुना बढ़ गए कम सुनने वाले मरीज

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। तेज आवाज में ईयरफोन से गाने सुनने की वजह से पांच साल में कम सुनने वाले मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। ये आंकड़े महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के हैं। इस समस्या के साथ कॉलेज में हर महीने 25 से 30 मरीज इलाज कराने के लिए आ रहे हैं।



इन दिनों ईयरफोन का इस्तेमाल युवाओं में काफी बढ़ गया है। कई तो रात में कान में इयरफोन लगाकर सो जाते हैं। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके कश्यप का कहना है कि लंबे समय तक हेडफोन, ईयरफोन या ईयरबड लगाकर गाने सुनने से कान पर दबाव पड़ता है। दबाव पर्दे के जरिये आंतरिक कान में जाता है। इससे श्रवण कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है और सुनने की क्षमता कम होने लगती है।
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शुरुआत में ये समस्या अस्थायी होती है। ऐसे में हेडफोन या इयरफोन का उपयोग बंद कर देने और दवाओं के जरिये समस्या खत्म हो जाती है। मगर अस्थायी समस्या होने के बावजूद लगातार इयर फोन का इस्तेमाल करने की वजह से श्रवण शक्ति स्थायी रूप से कमजोर हो जाती है। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले तक इस समस्या के साथ ओपीडी में हर महीने आठ से दस मरीज आते थे। अब हर माह 25 से 30 मरीज ये बीमारी होने पर इलाज कराने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कान में संक्रमण के कारण भी सुनने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
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तेज आवाज होने पर 120 डेसिबल तक पहुंच जाती ध्वनि



डॉ. कश्यप ने बताया कि श्रवण शक्ति कमजोर होने के शुरुआती लक्षणों में कानों में सनसनाहट की आवाज सुनाई देना भी शामिल है। ये लक्षण होने पर तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं। बताया कि मध्यम आवाज में सुनने पर ध्वनि 60 से 70 डेसिबल रहती है। जबकि, तेज आवाज में हेडफोन सुनने पर ध्वनि 120 डेसिबल तक पहुंच जाती है। इतनी तेज आवाज में लगातार हेडफोन पर गाने सुनने पर महज 10 मिनट में भी श्रवण कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है।
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