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बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत पर होगा काम

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झांसी। बुंदेलखंड की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को विश्व पटल पर लाने के लिए मंडलायुक्त अजय शंकर पांडेय ने इसके संरक्षण के साथ-साथ शोध कार्य करने पर जोर दिया है। इसके लिए 11 गतिविधियों पर कार्य किया जाएगा। ताकि, यहां की परंपराएं, साहित्य को प्रमाणिक तौर पर देश के सामने रखा जाए।
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मंडलायुक्त ने कहा कि पूरा क्षेत्र अतीत की स्वर्णिम और गौरवशाली, ऐतिहासिक स्मृतियों का साक्षी रहा है। इस क्षेत्र में कई विभूतियां हुई हैं। यहां की परंपराओं, रीति रिवाजों, जीवन दर्शन मेें कई विविधताएं हैं। इस क्षेत्र की तमाम अनकही बातें, परंपराएं, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियाें पर ध्यान देने की जरूरत है। इनको वैज्ञानिक, प्रमाणिक रूप से देश के समक्ष रखने करने की जरूरत है। इसके लिए कुछ मानक तय किए गए हैं, जिनमें संकलन, अन्वेषण, संरक्षण और शोध कार्य शामिल हैं। इसके लिए 11 गतिविधियों पर कार्य किया जाना है। कमिश्नर ने इसके लिए कार्यकारी समिति बनाई बनाने की बात कही है। इन कार्यों के लिए बीयू के संबंधित विभागाध्यक्षों का परामर्श भी लिया जाएगा। मंडल के जागरूक, विशेषज्ञ और रुचि प्रदर्शित करने वाले लोगों से भी विचार-विमर्श होगा।
ये हैं 11 गतिविधियां
साहित्य विंग, पर्यटन विंग, व्यंजन विंग, रीति-रिवाज व परंपराओं से संबंधित विंग, ऐतिहासिक स्थल विंग, फ्लोरा एवं फना विंग, जल संरक्षण विंग, हस्तशिल्प एवं उद्योग धंधों से संबंधित विंग, सांस्कृतिक विंग, नृत्य, गायन, नाटक, लोककला, विशिष्ट कृषि उत्पाद संरक्षण, पर्ल्स ऑफ बुंदेलखंड विंग ऐसी 11 गतिविधियां हैं, जिन पर काम होगा।
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