कोरोना महामारी से बचाव के लिए लागू किए गए लॉकडाउन में 23 मार्च से रेलवे वैगन मरम्मत कारखाना बंद कर दिया गया था। कारखाना प्रशासन ने चार मई से यहां दोबारा कामकाज शुरू करा दिया है। प्रतिदिन 33 फीसदी कर्मचारियों को बुलाया जा रहा है। कर्मचारी किस तरह बुलाए जाएं, इसका अभी कोई निर्धारित रोस्टर नहीं बनाया गया है। डब्लूआर टू अंडर फ्रेम शॉप में जरूर कर्मचारियों को एक दिन छोड़ एक दिन बुलाया जा रहा है। कई शॉप ऐसे हैं जहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं है। इन शॉपों में कर्मचारियों को मजबूरन पास- पास रहकर काम करना पड़ रहा है। प्रवेश व निकास के वक्त कर्मचारियों को सैनिटाइज करने के लिए तीन जगह बनाए गए केबिन बंद पड़े हैं। इस कारण कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारखाने के अंदर हाथ धोने के लिए बनाए पैडल ऑपरेटिव नल भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। लिक्विड साबुन भी हर वक्त उपलब्ध नहीं रहता है। - गृह मंत्रालय की गाइड लाइन के हिसाब से ही कर्मचारियों को बुलाकर काम कराया जा रहा है। सैनिटाइजर केबिन में सोडियम हाइपो क्लोराइड केमिकल का उपयोग किया जा रहा था। बताया गया कि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इस कारण उसका उपयोग बंद कर दिया गया। उसका विकल्प तलाशा जा रहा है। कर्मचारियों से सोशल डिस्टेंसिंग का शत प्रतिशत पालन करने के लिए कहा गया है। आरडी मौर्या, मुख्य कारखाना प्रबंधक। एक नजर में कारखाना उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में 25 नवंबर 1895 को स्थापित इस रेलवे वैगन मरम्मत कारखाने में वैगन मरम्मत के लिए वेल्डिंग, पेंटिंग, एसएसई यार्ड, एसएसई रीहेब, बीडब्लूआर, पावर हाउस, मिड नाइट, धातुशाला, व्हील, मशीन, आर बी फर्स्ट, सेकेंड, थर्ड, एयर ब्रेक लैब, टूल रूम समेत बाइस शॉप हैं। वर्तमान में इन शापों में तकरीबन 3800 कर्मचारी कार्यरत हैं। सात सौ कर्मचारी कार्यालय के काम में लगे हैं। मरम्मत के लिए देश भर से यहां वैगन भेजे जाते हैं। यहां प्रतिमाह 750 वैगनों की मरम्मत का लक्ष्य दिया गया है। आम दिनों में यहां कर्मचारी सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे, शाम चार बजे से रात 12 बजे और रात 12 बजे से सुबह आठ बजे की पाली में काम करते हैं।