झांसी। बुंदेलखंड की महिलाएं सेहत के लिए फिक्रमंद नहीं हैं। कम उम्र में ही वह जोड़ों और कमर दर्द का रोग पाल रही हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि उनके पास महिलाओं के जो भी केस आते हैं उनमें 70 फीसदी से अधिक केस बिगड़े हुए होते हैं। महिलाएं वर्षों बीमारी झेलने के बाद इलाज कराने आती हैं। यही वजह है कि अब 30 से 35 साल की उम्र में ही महिलाएं बुजुर्गों की तरह जोड़ों और कमर दर्द से कराह रही हैं।
झांसी की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपशिखा कृपलानी बताती हैं कि कामकाजी और गृहिणी दोनों तरह की महिलाएं मौसमी बीमारियों के साथ-साथ महिलाओं से संबंधित बीमारियों को भी गंभीरता से नहीं ले रहीं। उन्होंने बताया कि उनके पास हर महीने 40-50 केस आते हैं जिनमें ल्यूकोरिया (सफेद पानी), पीरियड के दिनों में काफी अधिक ब्लीडिंग, न्यूट्रीशन की कमी के कारण चक्कर आना और बार-बार गर्भ गिरने की समस्या होने पर भी महिलाएं तुरंत डॉक्टर के पास नहीं जाती हैं, वह दो-तीन वर्षों तक घरेलू इलाज या मेडिकल स्टोर आदि से दवा लेकर बीमारी को इग्नोर करती हैं। ऐसे में जब वह डॉक्टर के पास आतीं हैं, तब तक उनकी हालत काफी बिगड़ चुकी होती है। उस वक्त पता चलता है कि महिला ने इसे लेकर कभी कोई मेडिकल टेस्ट तक नहीं कराया। ऐसे में बाद टेस्टिंग होने पर पता चलता है कि महिला कई गंभीर रोगों से ग्रस्त हो चुकी है। कई बार जान को भी खतरा हो जाता है। डॉ. कृपलानी ने बताया कि छोटी बीमारी पर ध्यान नहीं दे रहीं इससे सेहत को लेकर महिलाओं में समस्या बढ़ रही है।
अधिक उम्र में शादी और अच्छी डाइट न होने से गर्भाधान में भी दिक्कत
झांसी। डॉ. दीपशिखा कृपलानी बताती हैं कि उनके पास महिलाओं के जो केस आते हैं उनमें अच्छी डाइट न मिलने की समस्या लगभग हर महिला में मिलती है। इसके अलावा खून की कमी, विटामिन और न्यूट्रीशन की कमी के साथ कमर दर्द की शिकायत होती है। जबकि इनकी उम्र 30 से 35-40 वर्ष ही होती है। वहीं इन सभी दिक्कतों के बने रहने से अधिक उम्र में शादी होने पर महिलाओं को गर्भ धारण करने में दिक्कत हो रही है। किसी तरह गर्भाधान हो भी जाता है तो आगे दिक्कतें आती रहती हैं। ऐसे में दवाइयों के अलावा महिलाओं को सबसे पहले अच्छी डाइट लेने की सलाह दी जाती है।
बीमारी छिपाती रहती हैं, अभी भी घर पर प्रसव कराए जा रहे
झांसी। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका बताती हैं कि कुछ महिलाओं को छोड़ दें तो अभी भी स्थिति ठीक नहीं है। महिलाएं अपनी बीमारी छिपाती रहती हैं। अभी भी घर पर प्रसव कराए जा रहे हैं, जब महिला की ब्लीडिंग नहीं रुकती है तब उन्हें हॉस्पिटल लाया जाता है। ऐसे में कई बार मरीज को बचाना मुश्किल होता है। कमर दर्द या जोड़ों के दर्द को महिलाएं थकान मानकर अपने काम में लगी रहती हैं, जबकि कम उम्र में सेहत की देखभाल बहुत जरूरी है।
ये हैं कारण
-अभी भी अधिकांश घरों में महिलाओं की सेहत पर ध्यान नहीं देते हैं।
-वर्किंग वुमन हो या गृहिणी, उनके पास अपने लिए समय नहीं है।
-पीरियड में भी किसी तरह की समस्या को आम समस्या समझना।
-गर्भाधान में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर के पास न जाना।
-झोलाछाप से इलाज करवाना, अच्छी डाइट न लेना।