झांसी। एक ओर जहां प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने का दावा कर रही है। तो वहीं जिला महिला अस्पताल में सालों से डॉक्टरों की कमी है। जिसके चलते अस्पताल का प्रसव कक्ष नर्सों के सहारे ही चल रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा कई बार लिखित रूप से चिकित्सकों की मांग की गई है। लेकिन अब तक डॉक्टरों को नियुक्त नहीं किया जा सका है।
अस्पताल में शहरी व ग्रामीण इलाकों से रोजाना लगभग चार सौ महिलाएं ओपीडी में इलाज कराने के लिए आती हैं। जिनमें से अधिकतर गर्भवती महिलाएं होती है। इलाज के दौरान लगभग दस से पंद्रह महिलाओं को प्रसव के लिए भर्ती किया जाता है। लेकिन अस्पताल में सिर्फ चार ही डॉक्टर हैं जिसमें से एक वरिष्ठ डॉक्टर अस्पताल में ज्वाइन करने के बाद से ही लगातार छुट्टी पर हैं। छुट्टी को ब्रेक करने के लिए सिर्फ एक या दो दिन की ड्यूटी कर वापस छुट्टी पर चली गई हैं। वहीं एक डॉक्टर रात की ड्यूटी में रहती हैं जो अगले दिन ड्यूटी नहीं कर सकती है। ऐसे में अस्पताल की ओपीडी, ओटी, प्रसव कक्ष व वार्ड में भर्ती मरीजों की देखरेख में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, डॉक्टरों की कमी होने के कारण कई महीनों से अस्पताल का प्रसव कक्ष नर्सों के सहारे ही चल रहा है।
इस संबंध में एडी हेल्थ डॉ. वीके सिन्हा ने बताया कि शासन स्तर पर चिकित्सकों के प्रमोशन की प्रक्रिया की जा रही है। जल्द ही महिला अस्पताल में भी डॉक्टरों की कमी को पूरा किया जाएगा।
सीएमएस खुद देख रही हैं ओपीडी
अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते अस्पताल की सीएमएस डॉ. शाहिदा परवीन ने मोर्चा संभाला है। वह अपने ही कक्ष में रोजाना लगभग सौ महिलाओं की ओपीडी के साथ ही गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन भी कर रही हैं।
दुष्कर्म पीड़िताओं को होती है परेशानी
जिले भर में महिलाओं व बालिकाओं के साथ दुष्कर्म की घटना होने पर जिला अस्पताल में मेडिकल की प्रक्रिया को किया जाता है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते दुष्कर्म पीड़िताओं को घंटों अस्पताल में बैठकर इंतजार करना पड़ता है।