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आयोग को सुनाई पीड़िताओं ने अपनी व्यथा

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कलेक्ट्रेट में महिला उत्पीडन की जन सुनवाई करती राज्य महिला आयोग की सदस्य कंचन जायसवाल(बाएं से दू
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आयोग को सुनाई पीड़िताओं ने अपनी व्यथा
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झांसी। बुधवार को राज्य महिला आयोग की ओर से जन सुनवाई का आयोजन किया गया, जिसमें एक दर्जन से अधिक महिलाओं ने अपनी व्यथा सुनाई। कोई महिला शादी का झांसा देकर शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत लेकर पहुंची, तो किसी ने शादी के बाद पति और ससुरालियों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न की समस्या सुनाई।
जन सुनवाई का आयोजन कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला प्रोबेशन कार्यालय में किया गया। यहां राज्य महिला आयोग की सदस्य डा. कंचन जायसवाल ने पीड़ित महिलाओं की व्यथा सुनी। यहां शिकायत लेकर पहुंची महिलाओं से पहले ही लिखित में प्रार्थना पत्र ले लिया गया था। इसके बाद उन्हें एक-एक कर बुलाया गया। आयोग की सदस्य के समक्ष चौदह महिलाओं ने अपनी व्यथा सुनाई। इनमें ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा से जुड़े रहे। शारीरिक उत्पीड़न से जुड़े भी मामले आए। सभी मामलों में आयोग की सदस्य ने पुलिस व संबंधित विभाग के अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पीड़िताओं को बताया गया कि उनके मामले में होने वाली कार्यवाही के विषय में समय-समय पर उनके मोबाइल पर मेसेज के जरिये बताया जाएगा।
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इस मौके पर सीओ सिटी जितेंद्र सिंह परिहार, जिला प्रोबेशन अधिकारी नंदलाल सिंह, महिला थाना की प्रभारी निरीक्षक पूनम शर्मा, आशा ज्योति केंद्र की प्रभारी संजना सिंह आदि मौजूद रहीं।
केस - 1
शादी के नाम पर बनाए संबंध
जन सुनवाई के दौरान एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ समय पहले उसकी मुलाकात एक युवक से हुई थी। बातचीत के दौरान मोबाइल नंबर का आदान प्रदान हो गया था। सिलसिला आगे बढ़ा, युवक ने अपने परिजनों से भी मिलवाया। शादी का वादा किया गया और फिर शारीरिक संबंध बना लिए। लेकिन, अब युवक शादी से मुकर गया है। इसकी शिकायत पुलिस से भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक युवक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है।
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केस - 2
बदले ससुराली, लगा रहे लांछन
शादी को छह साल हो चुके हैं। बच्चा अभी नहीं है। दो साल पहले तक सबकुछ ठीक चल रहा था। लेकिन, अब पति के किसी अन्य महिला से ताल्लुकात हो गए हैं। इसकी शिकायत ससुराल के अन्य लोगों से की तो, उन्होंने अनसुनी कर दी। बल्कि, महिला को ही चुप रहने की सलाह दे डाली। लेकिन, इसके बाद हालात और भी बिगड़ते जा रहे हैं। पति को तो समझाया नहीं जा रहा है, बल्कि उसी पर ही लांछन लगाए जाने लगे हैं। ससुराल छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। आए दिन मारपीट होती है।
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