महिला थाने का आगंतुक कक्ष, परिवार परामर्श केंद्र और मैस अपनी उपयोगिता खो चुके हैं। इन भवनों को आवासों में तब्दील कर दिया गया हैं। कंडम घोषित थानाध्यक्ष आवास में भी महिला पुलिस कर्मी रह रही हैं। महिला थाने के बिगड़ते हालातों पर किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं है। इस वजह से थाने पर आने वाली पीड़िता से खुले में बैठकर पूछताछ की जाती है।
महिला थाने पर पीड़िताओं को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करने पड़े, इसके लिए शासन ने आगंतुक कक्ष बनवाया था। जहां पीड़िता सहजता से बैठे और पुलिसकर्मी पूछताछ कर सकें। इसकी मंशा पीड़िता की लोकलाज का भी ध्यान रखना था। बावजूद इसके आगंतुक कक्ष को आवास बना लिया गया है। इसमें पूर्व थानाध्यक्ष ललिता कुमारी का सामान रखा हुआ है, जो वर्तमान में उरई में तैनात हैं। महिला पुलिस कर्मियों के लिए बने मैस और परिवार परामर्श केंद्र को भी आवास में तब्दील कर दिया गया है। महिला थाने में परिवार परामर्श केंद्र इसलिए बना था, ताकि टूटते रिश्तों को बातचीत के माध्यम से जोड़ा जा सके। इन दोनों के आवास में तब्दील होने की वजह से परिवार परामर्श केंद्र पुलिस लाइन में आयोजित हो रहा है। इस वजह से पीड़िताओं को भटकना पड़ता है। थानाध्यक्ष का आवास जीर्ण-शीर्ण घोषित हुए काफी समय गुजर गया है, बावजूद इसके अभी भी महिला पुलिस कर्मी इसे खाली नहीं कर रही हैं।
इसका खुलासा तब हुआ जब एसएसपी ने थानेदारों से कब्जों के बाबत पूछा। महिला थानाध्यक्ष पूनम शर्मा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जीर्ण-शीर्ण घोषित हो चुके थानाध्यक्ष के आवास में एसआई शैलजा भदौरिया, एससीपी कुंती देवी और सविता रह रही हैं। यह आवास कभी भी धराशायी हो सकता है, जिससे दुर्घटना हो सकती है। मैस के कमरों और परिवार परामर्श केंद्र पर पुलिस कर्मी प्रीति राजा, अमृता पांडेय और निरीक्षक रंजना गुप्ता ने आवास बना लिया है। प्रीति राजा पुलिस लाइन, अमृता पांडेय बरुआसागर थाने में तैनात हैं। रंजना गुप्ता महिला सम्मान प्रकोष्ठ की प्रभारी के पद पर तैनात है। पूर्व में इसको लेकर विवाद हो चुका है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अखिलेश चौरसिया का कहना है कि कंडम घोषित हो चुके थानाध्यक्ष के आवास में महिला पुलिस कर्मी अपने रिस्क पर रह रही हैं। यदि कोई बात होगी तो उनकी ही जान जोखिम में पड़ेगी। थाना परिसर में सुरक्षित महसूस करने की वजह से महिला पुलिस कर्मियों ने मैस, परिवार परामर्श केंद्र और आगंतुक कक्ष को आवास में बदल लिया है। जब आवास खाली होंगे, तो उन्हें आवंटित कर दिए जाएंगे।