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‘181 महिला हेल्पलाइन’ खुद हुई मोहताज

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woman helpline not found sallary for one year
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झांसी। महिलाओं की मदद के लिए शुरू की गई ‘181 महिला हेल्पलाइन’ खुद मोहताज हो गई है। जी हां, इस सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को एक साल से वेतन नहीं मिला है। डीजल खर्च न मिलने से हेल्पलाइन के चौपहिया वाहन के पहिये थमे हुए हैं। इतना ही नहीं, अब सीयूजी नंबर तक बंद कर दिया गया है।
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महिला सुरक्षा के मद्देनजर डायल 100 की तर्ज पर प्रदेश सरकार ने 181 महिला हेल्पलाइन की शुरुआत की थी। इस पर कोई भी महिला अपने साथ मारपीट, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़, दुष्कर्म, दहेज उत्पीड़न जैसी आपराधिक वारदात की शिकायत कर सकती थी। जिले में मई 2017 में इसकी शुरुआत हुई थी। लेकिन, पिछले एक साल से इसके बुरे दिन चल रहे हैं। हेल्पलाइन में तैनात चार सुगमकर्ता, ड्राइवर व दो अन्य कर्मचारियों को एक साल से वेतन नहीं मिला है। पीड़ित महिला तक पहुंचने के लिए एक चौपहिया वाहन भी उपलब्ध कराया गया था, लेकिन डीजल का खर्च न मिलने की वजह से गाड़ी के भी पहिये थम गए हैं। अब जाकर सीयूजी नंबर भी बंद हो गया है, जिसके जरिये पीड़ित महिलाएं हेल्पलाइन की टीम से संपर्क करती थीं। इन परिस्थितियों में महिलाओं की सहायता के लिए बनाई गई ये हेल्पलाइन सेवा कागजों में दर्ज इबारत भर बनकर रह गई है।
साढ़े छह सौ महिलाओं को मिली मदद
झांसी। जिले में महिला हेल्पलाइन सेवा के जरिये साढ़े छह सौ महिलाओं की मदद की जा चुकी है। इनमें तमाम महिलाएं ऐसी हैं, जिन्होंने आकस्मिक स्थिति में मदद के लिए गुहार लगाई थी। सूचना पर टीम ने मौके पर पहुंचकर महिलाओं को मदद उपलब्ध कराई थी। विदित हो कि टीम में हेल्पलाइन सेवा के कर्मचारियों के साथ पुलिस भी रहती थी।
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हेल्पलाइन सेवा में आउटसोर्स पर कर्मचारियों की तैनाती हुई थी। कर्मचारियों को वेतन उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। जल्द ही उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा। कोरोना वायरस के संक्रमणकाल की वजह से इसमें विलंब हुआ है।
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- नंदलाल सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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