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टेंडर निकाले बिना निरीक्षण गृह पर खर्च कर दिए 16 लाख

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झांसी। सिंचाई विभाग में बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है। सकरार प्रखंड ने बिना टेंडर कराए ही निरीक्षण भवन की सजावट एवं रखरखाव पर 16 लाख रुपये की मोटी रकम खर्च कर दी। खास बात यह कि यह काम उस दौर में कराए गए जब केवल आवश्यक कार्य ही कराए जाने थे।
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राठ निरीक्षण गृह के रखरखाव का जिम्मा सपरार प्रखंड के पास है। कुल 34 लाख रुपये से इसके पुर्ननिर्माण की योजना बनाई गई, लेकिन अभियंताओं ने पूरे काम के लिए टेंडर ही नहीं निकाला। ठेकेदारों को मदद पहुंचाने के लिए इस काम के दो टुकड़े कर दिए गए। 18 लाख रुपये से निरीक्षण गृह के भीतर फर्श आदि मरम्मत कार्यों के लिए निविदा निकाली गई। यह निविदा भी 48 प्रतिशत कम होने के बावजूद अभियंताओं ने मंजूर कर ली। वहीं, दूसरी तरफ शेष 16 लाख रुपये के कार्यों के लिए कोई निविदा ही नहीं निकाली गई। यह सारे काम वर्कआर्डर के जरिए कराए गए। यह पूरी रकम निरीक्षण गृह के बाहर बाउंड्रीवाल, बाग-बगीचे एवं अन्य कार्यों पर खर्च की गई। निरीक्षण गृह के सुंदरीकरण के लिए रंग-रोगन भी कराया गया। यह सारे काम बिना निविदा कराए अभियंताओं ने अपने चहेतों से करा लिए, जबकि शासन लगातार पारदर्शिता के लिए ई-टेंडरिंग पर जोर दे रहा था। शासन ने एक लाख से अधिक कार्यों के लिए ई-टेंडर अनिवार्य कर रखा है लेकिन, सिंचाई विभाग अभी भी इसे मानने को राजी नहीं है। इस गड़बड़ी की शिकायत जल संसाधन मंत्री से भी की गई है। उधर, अधिशासी अभियंता आरएन राजपूत ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि इसके लिए अधीक्षण अभियंता से इजाजत ली हुई है।
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