बेतवा से जुड़ी गुरसराय मुख्य नहर के टेल तक पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग ने माइनरों (संपर्क नहरें) में सफाई का काम शुरू करवा दिया है। इस काम के लिए सौ मजदूरों को अलग-अलग जगह लगाया गया है। दावा है कि पांच दिन के भीतर टेल (अंतिम छोर) तक पानी जरूर पहुंचेगा।
बेतवा से जुड़ी गुरसराय मुख्य नहर का जाल गरौठा विधानसभा क्षेत्र में 52 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इस बार सिंचाई विभाग ने रबी की फसल के लिए 77 दिन का रोस्टर तैयार किया था, लेकिन चुनावी माहौल के चलते 90 दिन पानी छोड़े जाने के बाद अभी भी पानी छोड़ा जा रहा है। मगर, इसके बाद भी गुरसराय मुख्य नहर में अंतिम 12 किलोमीटर तक अभी तक पानी नहीं पहुंच सका है। सोमवार को इस मामले को लेकर भाजपा किसान मोर्चा के नेता जवाहर लाल राजपूत ने ज्ञापन सौंपकर सिंचाई अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उनका नहरों की सिल्ट सफाई के नाम पर होने वाले भुगतान पर ज्यादा जोर है, जबकि पानी कई माइनरों में अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है। इससे खेती खराब हो रही है।
अगले दिन अधीक्षण अभियंता इंजी आरपी देशमुख के निर्देश पर अधिशासी अभियंता नियाज अहमद, सहायक अभियंता और अवर अभियंताओं ने क्षेत्र का भ्रमण कर बंधे/ आडे़, अवैध कुलावे (जो चलाए जा रहे हैं) और अवैध पंपों को भी बंद कराया, लेकिन पानी फिर भी आगे नहीं बढ़ा। नहर में सिवर घास के पांव पसारने से पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा था। विभाग ने अब सिवर घास को हटाने के लिए अब सौ मजदूरों को काम पर लगाया है।
‘पहले चार मार्च तक नहरों को चलाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब दस मार्च तक इनका संचालन होगा। गुरसराय मुख्य नहर के टेल तक पानी पहुंचाने के लिए सिवर घास की सफाई का काम शुरू कर दिया गया है। अगले पांच दिन में टेल तक पानी पहुंचने की उम्मीद है।’
नियाज अहमद, अधिशासी अभियंता बेतवा नहर प्रखंड।
ये भी दिक्कत
गुरसराय मुख्य नहर के टेल तक 15 सेंटीमीटर प्रति किलोमीटर की तलहटी पर ढाल(स्लोव) है। जबकि यह ढाल दस सेंटीमीटर प्रति किलोमीटर होनी चाहिए थी। ऐसी स्थिति में सिवार घास बढ़ने के चांस ज्यादा हो जाते है। दूसरा एक तरफ रास्ते में पहाड़ निकलता है, जिसकी मिट्टी भी नहर में आ जाती है। सिंचाई विभाग ने दिसंबर में नहर की सफाई कराई थी, लेकिन सिवर घास फिर उग आई।