झांसी। पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं करवाचौथ पर व्रत रखती हैं। बात पति की जिंदगी बचाने की आ जाए तो भी महिलाएं सावित्री की तरह हर जतन करती हैं और जीवन साथी को मौत के मुंह से भी बचा लाती हैं। बुंदेलखंड में भी कई ऐसी ‘सावित्रियां’ हैं, जिन्होंने अपनी किडनी देकर पति की जान बचाई। पत्नी की किडनी की बदौलत बुंदेलखंड में कई पति वर्षों से खुशहाल जीवन जी रहे हैं। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दोनों के रिश्ते की डोर और मजबूत हुई है। वहीं पति भी पीछे नहीं हैं। टीकमगढ़ के एक युवक ने अपनी किडनी देकर पत्नी का जान बचाई। इन जोड़ों का कहना है कि पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा है कि एक पर विपत्ति आए तो दूसरा उसकी रक्षा करे।
पत्नी आशारानी की किडनी से बची पति बाबूलाल की जिंदगी
झांसी। निवाड़ी के बाबूलाल राय को 1998 में किडनी में स्टोन की समस्या हो गई थी। उन्होंने लेजर विधि से ऑपरेशन करवाया मगर ये सफल नहीं हुआ। ऑपरेशन के दौरान स्टोन किडनी के अंदर चला गया, जिससे किडनी डैमेज हो गई। वह बीमार रहने लगे। दिल्ली एम्स में जांच कराने पर पता चला कि एक किडनी खराब है। दूसरी भी 40 प्रतिशत डैमेज हो चुकी है। 2015 में उन्हें तकलीफ बढ़ी तो दिल्ली के निजी अस्पताल में भर्ती हो गए। एक महीने बाद डॉक्टरों ने जवाब दे दिया कि जान बचाना मुश्किल है। इसके बाद वो तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने किडनी ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी। इस पर उनकी पत्नी आशारानी राय तुरंत अपनी किडनी देने के लिए तैयार हो गईं। दोनों का ब्लड ग्रुप अलग था, इसके बावजूद ट्रांसप्लांट हुआ, जो कि सफल रहा। उन्होंने बताया कि पत्नी 2005 में राष्ट्रपति द्वारा प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ महिला सरपंच के तौर पर सम्मानित हो चुकी हैं। उनके दो बेटे नितिन राय, निशांत राय और एक बेटी ऐश्वर्या राय है।
पत्नी अनीता की किडनी की बदौलत 15 साल से खुशहाल जीवन जी रहे प्रदीप
झांसी। रेलवे के मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक प्रदीप कुमार जैन (57) अपनी पत्नी अनीता जैन की किडनी की बदौलत 15 साल से खुशहाल जीवन जी रहे हैं। प्रदीप ने बताया कि 1986 में उनकी शादी हुई थी। वह फुटबॉल खिलाड़ी थे, इसलिए अक्सर शरीर में दर्द होने पर मेडिकल स्टोर से दर्द निवारक दवाएं लेकर खा लेते थे। इसी से उनकी किडनी खराब हो गई। 1997 में उन्हें इसकी जानकारी हुई तो इलाज शुरू हो गया। 2005 में डायलिसिस शुरू करनी पड़ेगी। उन्होंने बताया कि जब किडनी डैमेज होने की जानकारी पत्नी को हुई थी, तभी वो अपनी किडनी देने के लिए तैयार हो गई थीं। 2007 में डॉक्टर ने किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए कह दिया। चूंकि, उनका और पत्नी का ब्लड ग्रुप भी समान है, इसलिए बिना किसी परेशानी के पत्नी की किडनी उनमें ट्रांसप्लांट हो गई। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं।
पति धर्म निभाया... मनमोहन ने हेमलता को दी अपनी किडनी
झांसी। टीकमगढ़ निवासी मनमोहन दीक्षित (59) बैंक कर्मी हैं। उनकी पत्नी हेमलता दीक्षित की 2011 में दोनों किडनी खराब हो गई थीं। वह कभी दिल्ली तो कभी मध्य प्रदेश जाकर अपनी पत्नी का इलाज करवाते रहे। फिर डॉक्टर ने डायलिसिस कराने की सलाह दी। कई वर्षों तक डायलिसिस चली। गुजरात के एक अस्पताल के डॉक्टर ने किडनी ट्रांलप्लांट के लिए कहा तो मनमोहन बोल पड़े कि वह पत्नी को अपनी किडनी देने के लिए तैयार हैं। इसके बाद वहीं किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। उन्होंने बताया कि अस्पताल में भी लोग कह रहे थे कि अब तक तो महिलाओं को ही पति को किडनी देते देखा है। कहा कि वह दोनों एक दूसरे का बहुत ध्यान रखते हैं। बाकी, परिजनों का भी बहुत सपोर्ट मिलता है।