मऊरानीपुर में विधानसभा के पिछले दो चुनाव सपा और बसपा के बीच रहे हैं। जबकि, इससे पहले के सात चुनावों में मुख्य मुकाबले में कांग्रेस और भाजपा ही रहा करती थीं। यहां अब तक हुए विधानसभा के तेरह चुनावों में क्षेत्र की जनता ने सभी प्रमुख पार्टियों को मौका दिया। यहां से छह बार कांग्रेस, तीन बार भाजपा, एक बार सपा और एक बसपा ने बाजी मारी। इसके अलावा एक बार भारतीय जनसंघ और एक बार जनता पार्टी ने भी जीत हासिल की।
मऊरानीपुर को प्रदेश की बड़ी तहसीलों में से एक माना जाता है। मऊरानीपुर को जिला बनाने की मांग भी होती रही है, लेकिन इस दिशा में सरकार की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। मऊरानीपुर से समाजवादी पार्टी को केवल एक बार जीत हासिल हुई है। क्षेत्र की जनता ने पिछले चुनाव में सपा को लखनऊ पहुंचाया था। जबकि, इससे पहले के चुनाव में यह सीट बसपा के खाते में गई थी। सपा अपना जीत का क्रम दोहराने और बसपा खोई हुई सीट को दुबारा हासिल करने के मंसूबे के साथ इस बार मैदान में है। 2007 के चुनाव से पहले मऊरानीपुर की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस ही हावी हुआ करती थीं। सपा व बसपा मुख्य मुकाबले में भी नहीं पहुंच पाती थीं। यहां से कांग्रेस छह चुनाव जीत चुकी है और भाजपा इस सीट पर तीन बार अपना परचम फहरा चुकी है। इन दोनों ही राष्ट्रीय दलों इस बार के चुनाव में अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने की उम्मीद है। मऊरानीपुर से इस चुनाव में सपा ने निवर्तमान विधायक डा. रश्मि आर्य को प्रत्याशी बनाया है, तो बसपा ने पूर्व विधायक प्रागीलाल को मैदान में उतारा है। भाजपा और कांग्रेस ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं।
2012- डा. रश्मि आर्या (सपा), 2007- भगवती प्रसाद सागर (बसपा), 2002- प्रागीलाल अहिरवार (भाजपा), 1996- बिहारी लाल आर्य (कांग्रेस), 1993- बिहारी लाल आर्य (कांग्रेस), 1991- प्रागीलाल अहिरवार (भाजपा), 1989- प्रागीलाल (भाजपा), 1985- भागीरथ चौधरी (कांग्रेस), 1980- भागीरथ (कांग्रेस), 1977- प्रेमनारायण (जनता पार्टी), 1974- बेनीबाई (कांग्रेस), 1969- प्रेमनारायण (भारतीय जनसंघ) तथा 1967- बेनीबाई (कांग्रेस)
वेंटीलेटर पर है रानीपुर कपड़ा उद्योग
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मऊरानीपुर विधानसभा की आबादी 6,03,208 है। इनमें 4,01,576 मतदाता हैं। किसी जमाने में मऊरानीपुर के रानीपुर कस्बे के कपड़े की पूरे देश में तूती बोलती थी और यह रोजगार का बड़ा केंद्र हुआ करता था, परंतु सरकारी अनदेखी के चलते यह उद्योग बुरी तरह से पिछड़ गया। पिछले दो दशक से यह उद्योग वेंटीलेटर पर है। इस उद्योग में प्राण फूंकने के दावे और वादे तो खूब हुए, लेकिन धरातल पर ज्यादा काम नहीं हुआ। वर्तमान में यह क्षेत्र कृषि पर आधारित है।
आसान है भाजपा की जीत
मऊरानीपुर में भाजपा की जीत आसान है। क्षेत्र की जनता सपा विधायक की गुंडई से त्रस्त है। यहां तक कि उनकी पार्टी के लोग ही विरोध कर रहे हैं। भाजपा की केंद्र सरकार ने यहां विकास के कई काम किए हैं। कपड़ा उद्योग के विकास को आठ करोड़ की लागत से कलस्टर की स्थापना की जा रही है। गांव व शहर की सड़कों पर भी बहुत काम किया गया है।
- संजय दुबे, जिलाध्यक्ष - भाजपा
विकास ने गढ़े कीर्तिमान
पिछले पांच साल में मऊरानीपुर में आठ सौ करोड़ रुपये के विकास कार्य हुए हैं। यही वजह है कि क्षेत्र की जनता हमारे साथ है। भाजपा के पास अपनी उपलब्धि बताने के लिए कुछ भी नहीं है। यही वजह है कि यह दूसरों की मनगढ़ंत कमियां निकाल रहे हैं। सपा अपने हर वादे पर शत प्रतिशत खरी उतरी है। लोगों की सुरक्षा व क्षेत्र के विकास पर अभूतपूर्व काम किए गए हैं।
- पप्पू सेठ, सपा नेता
जमीन से जुड़ा है हमारा प्रत्याशी
मऊरानीपुर से बसपा ने पूर्व विधायक प्रागीलाल को प्रत्याशी बनाया है। वह जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं और सर्वसुलभ हैं। जबकि, वहां वर्तमान सपा विधायक की जनता से दूरी हो गई है। उनका अब आम लोगों से कोई नाता नहीं रहा है। विकास केवल विधायक का ही हुआ है, क्षेत्र का नहीं। यही वजह है कि जनता बसपा के साथ खड़ी हुई है।
- भूपेंद्र आर्या, जोनल कोआर्डिनेटर - बसपा
कांग्रेस के साथ किसान और बुनकर
रानीपुर में कपड़ा उद्योग की स्थापना कांग्रेस शासन में ही हुई थी, परंतु पिछले 27 सालों में अन्य दलों की सरकारों ने इसे चौपट कर दिया। कांग्रेस सरकार की कर्ज माफी की योजना से मऊरानीपुर के किसान भारी तादाद में लाभान्वित हुए थे। अन्य दलों ने विकास की बातें तो खूब कीं, परंतु धरातल पर काम नहीं किया। यह अब सभी के समझ में आ गया है। यही वजह है कि जनता कांग्रेस के साथ है।
- चंद्रशेखर तिवारी, जिलाध्यक्ष - कांग्रेस