झांसी। आखिर क्या योजना है खेल निदेशालय की, गर्मियां बीतने को हैं और नवीन खेल सत्र को प्रारंभ हुए दो माह से ज्यादा हो गया, लेकिन अभी तक ध्यानचंद स्टेडियम में एथलेटिक्स को छोड़ किसी भी अन्य खेल के अस्थायी कैंपों के संचालन को हरी झंडी नहीं दी है। ऐसे में महानगर के नवोदित खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा विकसित करने के लिए इधर - उधर भटकना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि बीते खेल सत्र वर्ष 2015-16 में ध्यानचंद स्टेडियम में बाक्सिंग, जिमनास्ट, क्रिकेट, एथलेटिक्स हाकी के अस्थायी कैंप लगे थे, इसमें लगभग तीन सौ बच्चों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन माह जनवरी में एकाएक खेल निदेशालय के फरमान पर इन कैंपों को बंद कर दिया गया।
इसके बाद उम्मीद थी कि नया खेल सत्र अप्रैल से शुरू होने के बाद खेल कैंप संचालित किए जाएंगे। लेकिन, एथलेटिक्स को छोड़ किसी भी अन्य खेल के कैंप को निदेशालय ने मंजूरी नहीं दी, जबकि क्षेत्रीय खेल विभाग ने बीते सत्र के खेल कैंपों क ो वर्तमान सत्र में पुन: संचालित करने के लिए संस्तुति निदेशालय को भेज दी थी।
खिलाड़ी व अभिभावक हैं निराश
कड़ी धूप में स्टेडियम के एक कोने में गेंदबाजी का अभ्यास कर रहे समीर के मुताबिक भले ही क्रिकेट के कैंप को मंजूरी न मिली हो, लेकिन आगे बढ़ने के लिए अभ्यास तो करना ही है। वहीं, स्टेडियम में अपने बच्चों के साथ आए अभिभावकों ने बताया कि गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने क ो है और अगर समय पर खेल कैंप शुरू होते तो, बच्चे अपनी छुट्टियों में और बेहतर तरीके से अभ्यास कर लेते।
विशेषज्ञ कोच देते हैं प्रशिक्षण
विभाग के मुताबिक अस्थायी खेल कैंप में शामिल होने के लिए 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे का रजिस्ट्रेशन शुल्क एक वर्ष का 110 रुपया एवं 18 वर्ष से ऊपर के खिलाड़ी से 200 रुपया प्रतिमाह शुल्क लिया जाता है। इन कैंपों में बच्चों को निदेशालय द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ कोच द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है, वहीं खेल उपकरण भी दिए जाते हैं। इसके अलावा प्रतिभागियों को खेल निदेशालय द्वारा संचालित जिला, मंडलीय, राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भी भेजा जाता है, ताकि इन्हें खेल की दुनिया में और अधिक से अधिक अवसर मिलें।
कब लगेगी स्टेडियम में घास
खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए ध्यानचंद स्टेडियम में ए ग्रेड की हरी घास बिछनी थी, जिसके लिए जेडीए ने लगभग 8.21 लाख रुपये दिए। विभाग के अनुसार घास को उद्यान निरीक्षक की निगरानी में एक निजी संस्था द्वारा मार्च से लगानी थी, लेकिन उक्त कार्य अभी तक शुरू भी नहीं हुआ।