अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महाकुंभ में संगम तट पर मंगलवार देर रात मची भगदड़ के दौरान पहले तो यह लगा कि अब बचना मुश्किल है लेकिन पुलिस देवदूत बनकर पहुंची। हमारी ओर जुटे सभी यात्रियों की पुलिस के जवानों ने घेराबंदी कर दी, जिससे बच पाए। यह बात बृहस्पतिवार की दोपहर महाकुंभ से लौटे जगदीश रावत ने साझा की।
अनारक्षित स्पेशल ट्रेन से दोपहर डेढ़ बजे झांसी स्टेशन पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि कुंभ मेला परिसर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रयागराज में भीड़ ही भीड़ नजर आ रही है। स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने पर चंद मिनटों में ओवरलोड हो जाती है। मेला परिसर में पहुंचने के लिए 25-30 किमी पैदल चलना पड़ जाता है। परिसर के भीतर जगह-जगह भंडारे चल रहे हैं, जिससे खाने की वहां कोई दिक्कत नहीं है लेकिन रुकने का वहां कोई इंतजाम नहीं है।
लाखों की संख्या में श्रद्धालु खुले आकाश के नीचे ही रात गुजारते हैं। हालांकि, पैसा खर्च करने पर टैंट मिल जाता है लेकिन वह हर किसी को नहीं मिल पाता है। श्रद्धालुओं ने कहा कि अत्यधिक भीड़ होने की वजह से बच्चे और बुजुर्गों का वहां जाना ठीक नहीं है। कुंभ परिसर में पहुंचने के लिए भीड़ की दिशा में ही चलना बेहतर है। विपरीत दिशा होने पर हादसे के शिकार हो सकते हैं।
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मेले में सब कुछ ठीक चल रहा था। अचानक मंगलवार की रात चीख-पुकार मचने लगी। किसी को पता नहीं था कि हुआ क्या, बस जिसे जहां जगह मिल रही थी, वह उसकी दिशा में भागा जा रहा था। इसी में लोगों की जान गई। - साधू संजय पुरी
कुंभ में भीड़ बहुत है। भीड़ देखकर पहले तो वहां जाकर लगा कि फंस गए। जहां हम लोग ठहरे थे, भगदड़ उससे काफी दूरी पर हुई थी। कुछ समय बाद ही मेला परिसर में शांति हो गई थी। भीड़ अधिक होने की वजह से मेला परिसर की व्यवस्थाएं गड़बड़ाई हुई हैं। - सुखदेवी रावत
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इस समय महाकुंभ में जाना जितना कठिन है, लौटना उससे भी ज्यादा मुश्किल है। ट्रेनों के आरक्षित कोच हों या वातानुकूलित, सभी खचाखच भरे हैं। स्थिति यह है कि आरक्षित सवारियों को भी अपनी सीटें नहीं मिल पा रही हैं। - जूली राय
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भैया, भगवान की कृपा है कि बचकर आ गए। भगदड़ की खबर आग की तरह से फैल गई थी। संगम तट पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ था। हम परिवार के सात सदस्यों के साथ थे। सभी एक कोने में दो घंटे तक बैठे रहे। - रूमा
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एकदम से मेले में सायरन की आवाजाें के साथ एंबुलेंसों का काफिला गुजरते दिखा। दिल एकदम से घबरा गया। मेला परिसर से बाहर आने की कोशिश की, लेकिन भीड़ की वजह से रास्ता नहीं मिल पाया। संगम तट से दूर जाकर मेला परिसर में ही एक टैंट के पास ठहरे रहे। - सोनू सिंह राठौर
1700 की क्षमता वाली ट्रेन में आए साढ़े पांच हजार यात्री
झांसी। हादसे के बाद से महाकुंभ में जाने वाले यात्रियों की संख्या में कमी आई है लेकिन वहां से आने वाली ट्रेनें खचाखच भरकर आ रही हैं। बृहस्पतिवार की दोपहर डेढ़ बजे झांसी स्टेशन पहुंची अनारक्षित मेला स्पेशल ट्रेन में लगभग साढ़े पांच हजार यात्री यहां पहुंचे। जबकि, बीस बोगियों की इस ट्रेन की क्षमता 1700 यात्रियों की है। प्रयागराज से आने वाली कमोबेश सभी ट्रेनों का यही हाल है। रेलवे का भी इस समय पूरा फोकस प्रयागराज से यात्रियों को निकालने पर लगा हुआ है। प्रयागराज से लगातार ट्रेनें झांसी की ओर भेजी जा रही हैं। ब्यूरो
कानपुर की ओर से प्रयागराज गईं ट्रेनें
झांसी। हादसे के बाद से रेलवे ने प्रयागराज के लिए चलाई जा रहीं ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित कर दिया है। अब प्रयागराज के लिए जाने वाली सभी ट्रेनें बांदा की जगह कानपुर होते हुए जा रही हैं। इसके अलावा, ट्रेनों को ठहराव देते हुए वहां ले जाया जा रहा है। आने वाली ट्रेनों के लिए लाइन क्लियर की जा रही है। इसके लिए आने वाली ट्रेनों को रोक दिया जाता है। हालांकि, रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तकनीकी कारणों से ट्रेनों को कानपुर होते हुए प्रयागराज भेजा जा रहा है। ब्यूरो