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मेडिकल कॉलेज को कब मिलेगा स्वतंत्र फीडर

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झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में स्वतंत्र फीडर के लिए नींद टूटने लगी है। कॉलेज प्रशासन ने कदम बढ़ाते हुए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को स्वतंत्र फीडर के लिए पत्र लिख दिया है। इसके अलावा अधिशासी अभियंता से मुलाकात कर समस्या के समाधान की मांग की है। वहीं, जनप्रतिनिधि भी इसके लिए सक्रिय हो गए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष से फोन पर बात की है, जबकि भाजपा विधायक ऊर्जा मंत्री से मुलाकात करने के लिए लखनऊ रवाना हो गए हैं।
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जिला अस्पताल को स्वतंत्र फीडर मिला होने की वजह से यहां 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिलती है। जबकि, मेडिकल कॉलेज को बार-बार होने वाले फॉल्ट का दंश झेलना पड़ रहा है। बिजली चली जाने पर जेनरेटर से इमरजेंसी, आईसीयू में आपूर्ति दी जाती है। मगर वार्ड में कुछ पंखे चल पाते हैं और कुछ नहीं। इससे मरीजों को गर्मी से जूझना पड़ता है। इसके अलावा गाउन, कॉटन और औजारों का स्ट्रलाइजेशन नहीं हो पाता है। इससे ओटी में ऑपरेशन होने में विलंब हो जाता है। सबसे बड़ी समस्या रेडियोलॉजी विभाग की मशीनें खराब होने से उत्पन्न हो जाती है।
अमर उजाला लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है, इसी का परिणाम है कि 45 सालों बाद अब मेडिकल कॉलेज के स्वतंत्र फीडर के लिए कवायद शुरू हो गई है। कॉलेज प्रशासन ने दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को स्वतंत्र फीडर के लिए पत्र लिख दिया है। पत्र में लिखा गया है कि 700 बेड के अस्पताल में कई आकस्मिक सेवाएं हैं, जिनमें निर्बाध विद्युत आपूर्ति की बेहद जरूरत है। अभी कॉलेज को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में जल्द से जल्द मेडिकल कॉलेज को स्वतंत्र फीडर उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद कॉलेज के अधिकारियों ने अधिशासी अभियंता से भी मुलाकात की। उन्हें भी अपनी समस्याएं बताईं।
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वहीं, इस प्रकरण में जनप्रतिनिधि भी सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस पार्टी के पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने यूपीपीसीएल के अध्यक्ष आलोक अग्रवाल से फोन पर बात की और जल्द ही समस्या के निस्तारण की मांग की। पूर्व मंत्री ने मुख्य अभियंता से भी फोन पर बात की। जबकि, भाजपा विधायक जवाहर लाल राजपूत सोमवार शाम को ही लखनऊ रवाना हो गए। वह मंगलवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मुलाकात कर यह मुद्दा उठाएंगे।
पढ़ाई भी होती है प्रभावित
स्वतंत्र फीडर न होने से सिर्फ मरीजों का ही रोना नहीं है, बल्कि मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्र भी इससे प्रभावित हैं। फॉल्ट हो जाने पर हॉस्टल की भी बिजली गुल हो जाती है। यहां जेनरेटर की व्यवस्था नहीं है। इससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है। साथ ही, बिजली जाने पर लाइब्रेरी में भी अंधेरा छा जाता है। मजबूरी में विद्यार्थियों को वहीं किताब बंद कर देनी पड़ती है।
स्वतंत्र फीडर के लिए दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को पत्र लिख दिया गया है। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है जल्द ही इस समस्या का हल निकल जाएगा।
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- डॉ. साधना कौशिक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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