बिजली विभाग का मानना है कि बिना रीडर की सहमति या जानकारी के बिजली की चोरी करना संभव नहीं है। अधीक्षण अभियंता राकेश कुमार गुप्ता ने ठेका कंपनी महालक्ष्मी को चेतावनी दी है कि यदि कहीं बिजली चोरी पकड़ी गई, तो उस क्षेत्र के मीटर रीडर को हटा दिया जाएगा।
महानगर में 95 हजार घरों में बिजली के कनेक्शन हैं, जिनकी रीडिंग लेकर बिल बनाने के लिए महालक्ष्मी कंपनी ने 55 मीटर रीडरों को लगा रखा है। विभाग को मिली जानकारी के मुताबिक महानगर में साठ हजार उपभोक्ताओं के मीटर घर के बाहर लगाने और साठ प्रतिशत क्षेत्र में एरियर बंच कंडक्टर बिछाने के बाद भी बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही है। बिजली चोरी के लिए कई तरकीबें अपनाई जा रही हैं। मीटर से ठीक पहले केबल में कट लगाकर, समानांतर केबल डालकर, मीटर का डिस्प्ले खराब करके, रिमोट लगाकर, मीटर धीमा करके, काले मीटर का इस्तेमाल बिजली चोरी हो रही है। यही कारण है कि तमाम कोशिश के बावजूद अभी भी 25 फीसदी लाइन लॉस है। यानी कुछ खपत का चौथाई हिस्सा तकनीकी खराबी और बिजली चोरी में जाया हो रहा है। विद्युत अधिकारियों का मानना है कि मीटर रीडर को बिजली चोरी की जानकारी होती है। उसे पता होता है कि कहां, किस तरह और कौन उपभोक्ता कितनी बिजली चोरी कर रहा है। इसके पीछे सुविधा शुल्क का खेल चलता है और इसी कारण मीटर रीडर बिजली चोरी की अनदेखी कर देते हैं। अगर मीटर रीडर साथ दें तो बिजली चोरों को आसानी से पकड़ा जा सकता है।
अब बिजली विभाग के अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाया है। वे अपने स्तर से बिजली चोरों पर नजर रखें हैं और पकड़ भी रहे हैं। इसके लिए अभियान भी चलाया जा रहा है। बिजली चोरी के कई मामले पकड़े भी गए हैं। अधीक्षण अभियंता (नगर) राकेश कुमार गुप्ता ने महालक्ष्मी कंपनी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने मीटर रीडरों केे जरिए बिजली चोरों की सूची उपलब्ध कराएं।