कोरोना संक्रमण के दौर में केंद्र सरकार किसानों को आर्थिक पैकेज के तहत राहत देने की बात कर रही है, लेकिन किसानों को गेहूं बिक्री तक का भुगतान नहीं हो पा रहा है। किसान गेहूं बेचने के बाद केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में आर्थिक पैकेज से राहत देने की बात बेमानी लगती नजर आ रही है। केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज में किसानों को भी शामिल किया है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ कई सहूलियतें देने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन मौजूदा दौर में किसान गेहूं का भुगतान पाने के लिए भटक रहे हैं। आलम यह है कि किसानों को गेहूं बेचने के 15-15 दिन बाद भी भुगतान नहीं हो रहा है। किसानों का कहना है कि सरकार पहले गेहूं का भुगतान कर दे, वो काफी रहेगा। आर्थिक पैकेज तो बाद में देखेंगे। अगर सही तरीके से आर्थिक पैकेज मिला, तो ही किसानों का भला हो सकता है। स्थिति यह भी है कि किसानों को सम्मान निधि का भी भुगतान नहीं हो रहा है। ऐसे में आर्थिक पैकेज की बातें महज दिखावा साबित हो रही हैं। 29 अप्रैल को गेहूं मोठ के पीसीएफ केंद्र पर 51 क्ंिवटल गेहूं बेचा था। आज तक भुगतान नहीं हुआ। रोज केंद्र प्रभारी ने पूछते हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता। आर्थिक पैकेज तो दूर की बात है। - कालीचरन, गांव जरहा खुर्द किसानों को बीज, उर्वरक खरीदने में दिक्कत होती। गेहूं बेचने के बाद अब तक भुगतान नहीं मिला है। इसके लिए अधिकारियों से कई बार कह चुके हैं। आर्थिक पैकेज के नाम पर बस कोरी बातें हो रही हैं।- सीताराम, बंगरा