प्रदेश की योगी सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों की मुफ्त दवा के लिए बजट तो उपलब्ध करा दिया है, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज को आवश्यकता थी बीस करोड़ की और दिए गए हैं सिर्फ डेढ़ करोड़।
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज की ओपीडी में प्रतिदिन तीन सौ से अधिक मरीज पहुंचते हैं। इसके अलावा रोजाना साठ - सत्तर मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। अस्पताल में मरीजों को मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके लिए हर साल लगभग बीस करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। सरकार द्वारा दवाओं के लिए पूर्व में उपलब्ध कराया गया बजट पिछले साल के अक्तूबर माह में खत्म हो गया था। इसके बाद कुछ समय तक दूसरे मदों की रकम से दवाइयों का प्रबंध किया गया। लेकिन, यह खत्म हो जाने के बाद से मरीजों को अस्पताल से दवाएं मिलना बंद हो गईं। मजबूरी में उन्हें बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। हालांकि, इस दौरान कई बार शासन से बजट की डिमांड की गई, परंतु विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते यह मिल नहीं पाया।
प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद पहली बार बजट उपलब्ध कराया गया है, वह भी ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। अस्पताल को दवाइयों के लिए बीस करोड़ रुपये की आवश्यकता है, मिले हैं महज डेढ़ करोड़ ही। मेडिकल कालेज के मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. हरिश्चंद्र ने बताया कि जरूरत के मुताबिक बजट नहीं मिला है, लेकिन इससे कुछ राहत जरूर मिलेगी। डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि जल्द और बजट मिलेगा। मिले हुए बजट से जल्द अस्पताल में दवाओं की व्यवस्था की जाएगी।
जिला अस्पताल का भी यही हाल
जिला अस्पताल में भी दवाइयों के लिए बजट का टोटा है। यहां दवाओं के लिए प्रति तिमाही अड़तीस लाख रुपये की आवश्यकता होती है। जबकि, अभी दिए गए हैं सिर्फ 18.72 लाख रुपये। मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. बी के गुप्ता ने बताया कि मरीजों को अस्पताल से ही दवा दी जा रही हैं। अन्य मदों से भी दवाइयों का बंदोबस्त किया जा रहा है। जून तक दवाओं के बजट की अगली किस्त आने की उम्मीद है।