झांसी।
मेघों की बेरुखी के कारण जिले के 40 प्रतिशत खेत खाली पड़े हैं। बारिश न
होने से हुई पानी की समस्या के कारण किसान फसलें नहीं बो पाए हैं। स्थिति
यह है कि दिसंबर का पहला पखवाड़ा बीतने के बावजूद अधिकांश खेत खाली हैं।
शासन
ने जिले में 1,55,904 हेक्टेयर में गेहूं बोने का लक्ष्य दिया था, सोमवार
तक जिले की 62,183 हेक्टेयर भूमि में ही गेहूं की बुवाई हो सकी थी। जौ के
लिए 7394 हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य था, सोमवार तक महज 4395 हेक्टेयर
में ही बुवाई हो सकी थी।
सरसों के लिए 9387 हेक्टेयर का लक्ष्य था, इसके
सापेक्ष 4324 हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी थी। तोरिया के लिए 1105
हेक्टेयर का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष मात्र 175 हेक्टेयर में ही बुवाई हो
सकी। अलसी का लक्ष्य 452 हेक्टेयर का था। किसानों ने 314 हेक्टेयर में
बुवाई की। चने की फसल के लिए 46,846 हेक्टेयर का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष
39,208 हेक्टेयर में बुवाई की गई। मटर का लक्ष्य 52,683 हेक्टेयर का था,
जिसके सापेक्ष 43,620 हेक्टेयर में बुवाई हुई। मसूर का लक्ष्य 37,680 का
था, जिसके सापेक्ष 31,930 हेक्टेयर में बुवाई हुई।
जिला कृषि अधिकारी
बीआर मौर्य ने बताया कि पानी की कमी के कारण किसान बुवाई नहीं कर पाए हैं।
उन्होंने किसानों से कम पानी में पैदा होने वाली फसलों को ही बोने की अपील
की है।
अब किसानों की आस बना चना
झांसी।
पानी की कमी से जूझ रहे बुंदेलखंड के खेतों को अब चना की फसल से ही आस है।
चना 25 दिसंबर तक बोया जा सकता है, जबकि गेहूं की चार किस्मों को अभी 15
जनवरी तक बोया जा सकता है। कम पानी वाले क्षेत्रों में गेहूं की बुवाई
जोखिम भरी हो सकती है।
रबी में गेहूं, चना, मटर और सरसों ही प्रमुख
फसलें होती हैं। सरसों और मटर की बुवाई का समय निकल गया है। अब इन दोनों
फसलों की बुवाई नहीं होगी। यदि कोई किसान इन्हें बोता भी है तो उसे नुकसान
उठाना पड़ेगा। कृषि सलाहकार दीपक कुशवाहा ने बताया कि अभी 25 दिसंबर तक चने
की 82 ग्याकी नस्ल का बीज बोया जा सकता है। चना कम पानी में लाभ दे सकता
है।
25 दिसंबर तक जौ और मसूर भी बोया जा सकता है। उन्होंने बताया कि गेहूं
की चार किस्में भी अभी बोयी जा सकती हैं। 31 दिसंबर तक गेहूं की टीवीडब्लू
550 व एफबी 2967 नस्ल का बीज बोया जा सकता है, वहीं 15 जनवरी तक उन्नत व
नैना नस्ल का बीज बोया जा सकता है। गेहूं अधिक पानी की फसल है, कम पानी
वाले क्षेत्र में यदि गेहूं बोया गया तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता
है।
शोधित कर बीज की बुवाई करें किसान
जो किसान गेहूं
की फसल के लिए अपने घर का बीज बो रहे हैं वह थीरम 75 प्रतिशत, डीएस 2.5
ग्राम या कोर्बोक्सिन 75 प्रतिशत डब्लूपी दो ग्राम मात्रा से प्रतिकिलो बीज
को शोधित कर बुवाई करें। ऐसा करने से फसल को पीली गेरूई एवं करनाल वंट रोग
से बचाया जा सकता है। यह जानकारी उप कृषि निदेशक कृषि रक्षा रमाशंकर सिंह
ने दी है।
रीता बहुगुणा लेंगी सूखे का जायजा
कांग्रेस
की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी बुंदेलखंड क्षेत्र में पड़े
सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए बृहस्पतिवार को देर शाम झांसी आएंगी।
विभिन्न क्षेत्रों में किसानों का हाल जानने के बाद वह शुक्रवार को ललितपुर
रवाना होंगी। यह जानकारी पीसीसी सदस्य भानु सहाय ने दी है।