गर्मी की तपिश बढ़ते ही महानगर के मेडिकल कालेज के इर्द गिर्द विकसित नए क्षेत्रों में रहने वाले सैकड़ों परिवार बूंद- बूंद पानी के लिए परेशान होना शुरू हो गए हैं। कुछ लोगों ने मौके का लाभ उठाकर समानांतर पानी देने की व्यवस्था कर रखी है। यह लोग हर माह एक हजार से पंद्रह सौ रुपये किराया वसूल रहे हैं। बदले में 24 घंटे के अंदर एक घंटे धीमी गति से पानी की आपूर्ति दी जाती है। यह पानी भी फिल्टर के बगैर पिया जाए तो आप बीमार पड़ सकते हैं।
महानगर का मेडिकल कालेज इलाका ड्राई क्षेत्र में आता है। यहां पर स्थित गुमनावारा, पिछोर, महाराणा प्रताप नगर, वकील कालोनी, करगुवां जी जैसे क्षेत्रों को विकसित हुए दस से पंद्रह वर्ष का समय बीत चुका है। मगर आज भी इन क्षेत्रों में प्रशासन द्वारा पेयजल आपूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। दस वर्ष पूर्व जिन लोगों ने बोर्ग़ि कराकर अपने घर बनवाए थे, आज उनकी बोरिंग में एक बाल्टी पानी नहीं निकल रहा है।
ऐसा कोई बाशिंदा नहीं, जिसने पानी की तलाश में दो से तीन बोर न कराए हाें, मगर डेढ़ सौ फीट तक की खुदाई में हाथ आता है सिर्फ एक या दो बाल्टी पानी। वह भी घंटों के अंतराल में। बिना पानी के यहां के लोगों को एक- एक दिन काटना मुश्किल भरा हो रहा है। कुछ किस्मत के धनी लोगों के घर में पानी निकल भी आया तो उन्होंने बड़ा बोर कराकर उसको व्यावसायिक रूप दे दिया है।
इन लोगों ने आस पास की गलियों में जमीन के ऊपर खुद की पाइपलाइन बिछा रखी है। अगर आपको इस पाइप लाइन से कनेक्शन लेना है तो पहले सिक्योरिटी के रूप में चार से पांच हजार जमा करने होंगे। इसके बाद हर माह एक हजार से डेढ़ हजार रुपये तक मासिक किराया वसूला जाता है। बदले में सुबह शाम एक- एक घंटे आपूर्ति दी जाती है।
‘जल निगम ने पेयजल महायोजना के अंतर्गत इन क्षेत्रों को शामिल कर रखा है। फिलहाल बराठा बेसिन पेयजल योजना से इन क्षेत्रों को जुलाई तक पानी उपलब्ध होने लगेगा। जल्द ही यहां पाइप लाइन डालने का काम शुरू हो जाएगा। जलसंस्थान जल्द ही यहां टैंकरों का संचालन शुरू करेगा।’
अमित सिंह, अधिशासी अभियंता जलनिगम।
टैंकरों को शीघ्र चलाने की मांग
महाराणा प्रताप नगर, गुमनावारा क्षेत्र के लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर टैंकरों का शीघ्र संचालन करने की मांग की है। ज्ञापन में यशपाल सिंह चौहान, पुष्पेंद्र सिंह, कांति शर्मा, बृज बिहारी पटैरिया, चिरंजीलाल तिवारी, दिवाकर सोनी, गजराज सिंह, प्रताप सिंह, वीरू भास्कर के हस्ताक्षर हैं।
हैंडपंप भी देने लगे जवाब
इन सभी क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक हैंडपंप लगे हैं। मगर इन दिनों दस से बारह हैंडपंप ही पानी दे रहे हैं। इन हैंडपंपों पर दिनभर खटर- खटर होती रहती है। साथ ही, कुछ दूर पर मेडिकल कॉलेज के लिए जाने वाली पाइप लाइन एक जगह टूटी है, वहां से लोग पीने का पानी भरने जाते हैं। वहीं, क्षेत्र में लगातार जल स्तर गिर रहा है, इस कारण खराब हैंडपंपों की मरम्मत का काम भी समय पर नहीं हो पाता है।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
यहां के लोगों का जीवन या तो समानांतर व्यवस्था से मिल रहे पानी, टैंकरों या हैंडपंप के पानी पर निर्भर है। इन सभी स्रोतों से बिना जल शोधन के ही पानी प्राप्त हो रहा है। लगातार ऐसा पानी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालता है।
मकानों की नहीं कीमत
इन क्षेत्रों में लोगों ने एक से एक आलीशान मकान बना रखे हैं। मगर पानी की समस्या से लोगों को अपने आलीशान घर बंजर से नजर आते हैं। यही कारण है कि जो पैसा लगाकर लोगों ने अपने घर बनाए हैं, उनको बेचने पर वह कीमत नहीं मिल पा रही है।
घट गया जल स्तर
मेडिकल कालेज के इर्द गिर्द क्षेत्रों का लगातार जल स्तर घटता जा रहा है। दस साल पूर्व तक यहां पचास फीट तक पानी मिल जाता था, मगर अब डेढ़ सौ फीट बोरिंग कराने पर थोड़ा बहुत पानी मिल पाता है।
अनेक घरों का निर्माण पड़ा है अधूरा
पानी की किल्लत के कारण इन क्षेत्रों में अनेक घरों का निर्माण अधूरा पड़ा है। अधिकांश ने पूरा कंस्ट्रक्शन कराने का इरादा बदल दिया है। अधूरे निर्माण के कारण लोगों के लाखों रुपये डंप होकर रह गए हैं।
बहुत परेशान हो रहे
मेरा परिवार पानी को लेकर बहुत परेशान हो रहा है। पानी खरीदना बहुत महंगा पड़ रहा है। इस कारण दूर हैंडपंप से पानी ला रहे हैं।
अनिल मिश्रा, स्थानीय निवासी।
मांगे जा रहे दो हजार रुपये
मैंने प्राइवेट में जो पानी दे रहे हैं उनसे बात की थी। वह मेरे से दो हजार रुपये मांग रहे हैं। अब तो सिर्फ टैंकरों पर भरोसा है।
रेखा, स्थानीय निवासी।
एक महीना देरी से हुए परेशान
इस बार बारिश अच्छी होने से मार्च तक हैंडपंपों में पानी बना रहा। नहीं तो फरवरी से ही दिक्कत शुरू हो जाती थी। अभी हैंडपंप से एक बाल्टी से ज्यादा पानी नहीं निकल रहा।
हेमंत सिंह चौहान, स्थानीय निवासी।
दो बोरिंग हो चुकीं फेल
दो बार बोरिंग डेढ़ सौ फीट तक करा चुके हैं, मगर एक बाल्टी से ज्यादा पानी नहीं निकलता है। रात के अंधेरे में हैंडपंप से पानी भरने जाना पड़ता है।
मोहम्मद हमीद, स्थानीय निवासी।