झांसी। बुंदेलखंड के सूखे खेतों को हरा-भरा बनाने के लिए पानी की कमी को दूर करने का काम अब मनरेगा से किया जाएगा। केंद्र सरकार ने मनरेगा की तकनीकी गाइड लाइन जारी कर सामर्थ्य योजना शुरू की है। इस योजना में नये साधन तैयार करने के साथ पारंपरिक संसाधनों का विकास किया जाएगा।
तेजी से नीचे गिर रहा भूगर्भ जल चिंता का विषय बना हुआ है। भूगर्भ जल को बचाने के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन उनके कारगर साबित नहीं होने के कारण सरकार चिंतित है। पानी के साधनों के विकास के लिए सरकार ने अब मनरेगा का सहारा लिया है।
भारत सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के तहत अब महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जल के संरक्षण व संचय की योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के पारंपरिक संसाधन जैसे कुआं, बावड़ी तालाब आदि का विकास किया जाएगा।
मनरेगा के अधिकारी उद्यान विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर बौछारी सिंचाई को बढ़ावा देने का प्लान तैयार करेंगे तथा उसे अपनाने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करेंगे। वहीं, गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए गोमूत्र से खाद बनाने की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों का सहयोग लिया जाएगा।
मनरेगा उपायुक्त विकास मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार मनरेगा से अब खर्चीले चेकडैम के स्थान पर गेवियन स्ट्रक्चर तैयार किए जाएंगे। गेवियन स्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए पहले लोहे के जाल का स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है, उसके सहारे पत्थरों का चेकडैम तैयार किया जाता है।
पानी के साथ बहकर आने वाले मिट्टी व बालू से यह स्ट्रक्चर खुद-ब-खुद तैयार हो जाता है। चेकडैम की तुलना में इसकी लागत 80 फीसदी कम होती है।