संवाद न्यूज एजेंसी
मऊरानीपुर। गांवों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए ग्राम पंचायतों में रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) बनाए गए हैं, लेकिन, ज्यादातर ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए ये सेंटर शोपीस भर साबित हो रहे हैं। इसका अंदाजा मऊरानीपुर विकासखंड की स्थिति को देखकर लगाया जा सकता है। यहां बनाए गए 63 आरआरसी में से 55 बंद पड़े हुए हैं।कमोबेश यही स्थिति जिले के ब्लॉकों में भी बनी हुई है।
साफ-सुथरे गांवों की कल्पना के साथ स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में आरआरसी बनाए गए हैं। सरकार की ओर से इस योजना की शुरुआत साल 2022 में की गई थी। शुरुआत में वित्तीय वर्ष 2022-23 में मऊरानीपुर विकासखंड की सात ग्राम पंचायतों में आरआरसी बनाए गए थे। इसके अगले वर्ष 2023-24 में 28 और 2024-25 में 31 ग्राम पंचायतों में आरआरसी बनाए गए थे। मऊरानीपुर विकासखंड की 66 ग्राम पंचायतों में से 63 में आरआरसी बनकर तैयार हो चुके हैं। लेकिन, इनमें से ग्राम पंचायत स्यावरी, धवाकर, ढकरवारा, ककवारा, बम्होरी, घाट कोटरा, खिलारा व भानपुरा में ही इनका सुचारू रूप से संचालन किया जा रहा है। शेष 55 ग्राम पंचायतों में यह सेंटर किसी उपयोग में नहीं आ रहे हैं।
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निर्माण पर खर्च हुए लाखों
आरआरसी सेंटर के निर्माण पर भारी भरकर धनराशि खर्च की गई है। ग्राम पंचायत की आबादी के हिसाब से इनका आकार सुनिश्चित किया गया है। सेंटरों के निर्माण पर न्यूनतम ढाई लाख से अधिकतम नौ लाख रुपये तक की धनराशि खर्च की गई है।
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यह थी योजना
योजना के तहत गांवों से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे को आरसीसी में अलग-अलग किया जाना था। अलग किए गए कचरे में शामिल प्लास्टिक, लोहा आदि को बेचकर मिलने वाली रकम को ग्राम पंचायत के खाते में जमा कराने का प्रावधान है, ताकि ग्राम पंचायत की आय में वृद्धि हो सके।
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ई-रिक्शों के थमे है पहिये
ग्राम पंचायतों में घर-घर से गीला और सूखा कचरा एकत्र करने के लिए ई-रिक्शे भी दिए गए थे। इन ई-रिक्शों के माध्यम से कचरा आरआरसी तक पहुंचाया जाना था। लेकिन, आरआरसी की तरह ई-रिक्शे भी किसी काम नहीं आ रहे हैं। इनके भी पहिये थमे हुए हैं।
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भंडरा में आरआरसी बना शराबियों का अड्डा
मऊरानीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत भंडरा में बना कचरा निस्तारण केंद्र का उपयोग शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में यह शराबियों का अड्डा बनकर रह गया है। इसका अंदाजा सेंटर के अंदर फैले शराब के खाली पाऊच को देखकर लगाया जा सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि दिन में भी सेंटर पर शराबी डेरा डाले रहते हैं।
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जिन ग्राम पंचायतों में रिसोर्स रिकवरी सेंटर चालू नहीं हैं, उन्हें एक सप्ताह के अंदर शुरू कराया जाएगा। ग्राम पंचायतों में कर्मचारियों की तैनाती कर नियमित रूप से कार्य कराया जाएगा।
- महेंद्र पटेल, एडीओ पंचायत