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ट्रेन के प्रसाधन से बदबू भगाएगा ‘वेंचुरी’

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ट्रेन के प्रसाधन से बदबू भगाएगा ‘वेंचुरी’
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मुकेश साहू
झांसी। जल्द ही चलती ट्रेन में शौचालय (प्रसाधन) का उपयोग करने पर मुसाफिरों को बदबू का सामना नहीं करना होगा। रेल प्रशासन मंडल से संचालित 25 से अधिक ट्रेनों के शौचालयों में वेंचुरी उपकरण लगाने जा रहा है। वेंचुरी शौचालय में शुद्ध हवा को अंदर लाकर दूसरे रास्ते से बदबू को निकालने का काम करेगा। एक उपकरण को लगाने में तीन हजार रुपये का खर्च होगा। शुरूआत में 1044 कोचों में यह व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है।
रेल मंडल से संचालित 25 से अधिक ट्रेनों में 508 कोच लगे हैं। इन सभी कोचों में बायो टॉयलेट की सुविधा प्रदान की कर दी गई है। इसके लिए उक्त कोचों में 1950 बायो टैंक लगाए गए हैं। साथ ही प्रशासन कोच और उनके शौचालय को और बेहतर बनाने में लगा है। इसी पहल के तहत अब कोच के शौचालय में वेंचुरी उपकरण लगने जा रहे हैं। जिस दिशा में ट्रेन चलती है उस दिशा से यह उपकरण शुद्ध हवा को लेकर शौचालय के अंदर लाता है और दूसरे सिरे से दुर्गंध बाहर चली जाती है। इससे शौचालय में बदबू नहीं रहती है। साथ ही सभी शौचालय के दरवाजे के नीचे रोशनदान भी बनाए जाएंगे। इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि मंडल से संचालित ट्रेनों के शौचालयों में वेंचुरी उपकरण लगाने के लिए टेंडर डल गए हैं। जल्द ही इनको लगाने काम शुरू हो जाएगा।
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बुंदेलखंड एक्सप्रेस में है यह सुविधा
ग्वालियर से वाराणसी के बीच चलने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस में रेलवे की उत्कृष्ट योजना के तहत बदलाव किया गया है। इस ट्रेन में उत्कृष्ट प्रणाली का एक रैक चलने लगा है। इस रैक का आधुनिक तरीके से कायाकल्प किया गया है। कोच के अंदर व बाहर नए रंगों में पेंटिंग की गई है, जिससे माहौल रंगबिरंगा दिखाई देता है। शौचालय, वॉश बेसन व दरवाजे के आसपास की दीवारों को भी रंगा गया है। आरामदायक शौचालय बनाए गए हैं। शौचालय के बाहर प्लास्टिक के मैट बिछाए गए हैं। साथ ही शौचालय में वेंचुरी उपकरण भी लगाए गए हैं।
यह ट्रेनें होती हैं संचालित
मंडल से झांसी-बांद्रा एक्सप्रेस, झांसी - लखनऊ इंटरसिटी, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम एक्सप्रेस, झांसी-इटावा एक्सप्रेस, झांसी-इंदौर एक्सप्रेस, उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति, बुंदेलखंड एक्सप्रेस, चंबल एक्सप्रेस, झांसी - कानपुर पैसेंजर, झांसी - लखनऊ पैसेंजर, झांसी- खजुराहो पैसेंजर, झांसी- बीना पैसेंजर, झांसी- आगरा पैसेंजर, झांसी- बांदा पैसेंजर, ग्वालियर - आगरा पैसेंजर, झांसी- इटारसी पैसेंजर आदि ट्रेनों का संचालन होता है।
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यह होता है वेंचुरी
किसी पाइप में द्रव का प्रवाह होने पर जहां पाइप पतला होता है (अर्थात जहां द्रव का वेग अधिक होता है) वहां द्रव का दाब कम हो जाता है, इसे ही वेंचुरी प्रभाव कहते हैं। इस प्रभाव का नामकरण इटली के भौतिक विज्ञानी गिओवानी बतिस्ता वेंचुरी के नाम पर किया गया है। यह बरनोली के सिद्धांत पर कार्य करता है।
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