झांसी। छुट्टा जानवरों का डेरा खासकर सब्जी, फल मंडियों के अलावा बाजारों में भी है। इससे दुकानदारों, कारोबारियों के अलावा खरीददार भी त्रस्त हैं। बुजुर्ग बाजार जाने से डरते हैं। सब्जी मंडी बस स्टैंड, सीपरी बाजार, बड़ा बाजार, प्रेमनगर, नंदनपुरा, नरिया बाजार, दतिया गेट, बड़ागांव गेट, शिवाजी नगर समेत ऐसी कोई सब्जी मंडी नहीं है, जहां छुट्टा जानवर न दिखें। वे दुकानों पर मुंह मार देते हैं और खरीददारों को दौड़ा लेते हैं। मुर्गा, मछली और बकरा मंडी में आवारा कटखने कुत्तों की बहुतायत रहती है।
हमला कर देते हैं
सब्जी मंडी में ज्यादातर जानवर तालाबपुरा से आते हैं। अक्सर झपट्टा मारकर सब्जी खा जाते हैं, जिससे भारी नुकसान होता है। कुछ जानवर तो हमला कर देते हैं। हर सब्जी दुकानदार डंडा रखता है ताकि उन्हें भगाया जा सके।
- बाबूलाल
सब्जी कारोबारी
झपट्टा मार देते हैं
हंसारी से सब्जी खरीदने आते हैं, लेकिन छुट्टा जानवरों के कारण बड़ी परेशानी होती है। जानवर मोटर साइकिल पर टंगे थैले में मुंह मार देते हैं। सब्जी गिरकर खराब हो जाती है। नगर निगम पता नहीं इस बड़ी समस्या से क्यों मुंह फेरे है।
- अनंतराम पाली
हंसारी
भीड़ से बचकर आता हूं
बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है। अब मैं उस वक्त सब्जी मंडी जाता हूं, जब वहां ज्यादा भीड़ न हो, ताकि जानवरों पर नजर रख सकूं। हैरानी होती है कि इस बड़ी समस्या के समाधान के लिए कोई सोच क्यों नहीं रहा है।
- महावीर शरण
हंसारी
बच्चों को नहीं लाते
सारंध्रा नगर से सब्जी खरीदने आते हैं। जानवरों के कारण सब्जी मंडी और बाजारों में गंदगी रहती है। बदबू के कारण बुरा हाल रहता है। बच्चों को तो मंडी में लाते ही नहीं हैं। अब तो नगर निगम से भरोसा उठ ही गया है।
- मैरी पिंग्क्यू
सारंध्रा नगर
क्या ऐसे बनेगी स्मार्ट सिटी
अब तो सब्जी मंडियों की पहचान कचरे के ढेर और छुट्टा जानवर हैं। क्या इसी तरह स्मार्ट सिटी बनाएंगे झांसी को। ताज्जुब की बात है कि इतनी बड़ी समस्या पर जिला प्रशासन का ध्यान क्यों नहीं जा रहा। हद हो गई है।
- रश्मि
सदर बाजार
गोपालकों पर भी कार्रवाई हो
छुट्टा पशुओं की समस्या दिन पर दिन गंभीर होती जा रही है। यदि कोई जानवर पालना नहीं चाहता है तो वह गोशाला भेज सकता है। ऐसे गोपालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिये जो उन्हें चरने के लिए छुट्टा छोड़ देते हैं।
- अशोक सोनी
बीकेडी चौराहा
कैटल कैचर वाहन हो रहा कबाड़
छुट्टा जानवर पकड़ने के लिए करीब 11 लाख रुपए में खरीदा गया कैटल कैचर वाहन कबाड़ हो रहा है। नगर निगम चाहे तो इसकी मरम्मत कराकर इसका इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन साधन-संसाधन उपलब्ध न होने बहाना है। छुट्टा जानवरों को पकड़ने के लिए नगर निगम तीन साल पहले वाहन खरीदा गया था, लेकिन वह शोपीस बना है। अब तो कबाड़ होता जा रहा है। एक भी जानवर नहीं पकड़े।
प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन ने 18 अप्रैल 2016 को सभी निकायों को छुट्टा जानवर पकड़ने के निर्देश दिए थे, किसी को चिंता नहीं है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. राकेश बाबू ने बताया कि पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के सहयोग से अभियान चलाया जाएगा। यह भी कोशिश है कि दैनिक वेतन पर कुछ प्रशिक्षित कर्मचारियों को भर्ती किया जाए।
बंदर किले के अंदर
रानी झांसी का ऐतिहासिक दुर्ग देखने पहुंचने वालों को बंदर परेशान करते हैं। वे लोगों के हाथों से बैग छीन लेते हैं। हमला भी कर देते हैं। बच्चे डर जाते हैं।
कॉलोनी से खदेड़े आवारा जानवर
बृहस्पतिवार को पारीछा स्थित तापीय परियोजना की आवासीय कॉलोनी से छुट्टा जानवरों को खदेड़ दिया गया। कॉलोनी वासियों ने बताया कि विगत कुछ महीनों से जानवराें की अड्डा बना था। कॉलोनी वालों ने कई बार आवारा जानवरों की समस्या से निजात दिलाने के लिए गुहार की थी। सीआईएसएफ के जवानों ने अभियान चलाकर आवारा जानवरों को परिसर कॉलोनी से बाहर निकाला।