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माह में दो दिन हॉस्टल का खाना खाएंगे वीसी

Fri, 25 Dec 2015 01:34 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति महीने में दो दिन हॉस्टल का खाना खाएंगे। अचानक ही वह किसी भी दिन हॉस्टल पहुंचेंगे, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं दी जाएगी। हॉस्टल सुविधाओं का जायजा लेने के लिए वह ऐसा करेंगे।
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बृहस्पतिवार को कार्यभार ग्रहण करने के बाद नवनियुक्त प्रो. सुरेंद्र दुबे लार्ड बुद्धा और समता ब्वॉयज हॉस्टल का जायजा लेने पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। छात्रों ने वीसी को हॉस्टल में पानी की समस्या के बारे में बताया। इसके अलावा भी छात्रों ने उनसे ‘मन की बात’ कही।

वीसी ने बताया कि छात्रों को हॉस्टल में कैसा खाना परोसा जा रहा है, इसका जायजा वह समय-समय पर खुद वहां का खाना खाकर लेते रहेंगे। महीने में वह दो दिन हॉस्टल पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों की हर समस्या का जल्द से जल्द निराकरण कराया जाएगा। इससे पूर्व उन्होंने कुलसचिव पीएन प्रसाद समेत विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और डीन्स के साथ बैठक कर सेमेस्टर, वार्षिक परीक्षा समेत अन्य जानकारियां लीं। लॉ विभाग में पहुंचकर चल रही परीक्षाओं का भी जायजा लिया।
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कर्मचारी संघ को दिए सुझाव
नवनियुक्त कुलपति से मुलाकात करने के लिए कर्मचारी संघ के कई सदस्य भी पहुंचे। इस दौरान कुलपति ने संघ को कई सुझाव दिए। वीसी ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय में कर्मचारी संघ ने वर्ष में दो सेमिनार किया। शिक्षा के विकास में कर्मचारियों ने भूमिका निभाई। गोरखपुर में संघ द्वारा ऑल इंडिया क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित करने की भी बात बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि संघ अब बीयू में काव्य गोष्ठी, खेलकूद प्रतियोगिता, नाटक का भी आयोजन कर सकता है।

बीयू पीवीसी ने दिया इस्तीफा
झांसी। ‘निजाम’ बदलते ही बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति ने इस्तीफा दे दिया है। कुलपति द्वारा भी त्यागपत्र को तुरंत स्वीकार कर लिया गया।  पूर्व कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय के कार्यकाल समाप्ति के बाद नव नियुक्त वीसी प्रो. सुरेंद्र दुबे ने बृहस्पतिवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया।

नए ‘निजाम’ के कुर्सी संभालते ही प्रति कुलपति प्रो. पंकज अत्रि ने उन्हें अपने पद का त्यागपत्र दे दिया। बिना कोई देरी किए कुलपति ने भी प्रो. अत्रि का त्यागपत्र स्वीकार कर लिया। कुलपति ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अब वह जरूरत पड़ने पर ही किसी को प्रति कुलपति बनाएंगे।

इससे यह भी संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल किसी को इस पद पर नियुक्त किए बिना ही कुलपति कार्य करेंगे। हालांकि, उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची भी मांग ली है। यदि आवश्यकता पड़ी तो वह उसी आधार पर नयापीवीसी नियुक्त कर सकते हैं। वहीं, सूत्रों के अनुसार पीवीसी पद खाली होने की सूचना मिलने के बाद ही कुछ प्रोफेसरों की महत्वाकांक्षाएं जाग उठी हैं। सब अपने ‘नंबर’ बढ़ा कर यह पद हासिल करने की जुगत में लग गए हैं।

वहीं, बताया जाता है कि विश्वविद्यालय के ‘निजाम’ बदलने के बाद प्रति कुलपति का पद से इस्तीफा देना रुटीन प्रक्रिया का हिस्सा होता है। अहम बाद यह होती है कि नवीन कुलपति त्यागपत्र स्वीकार करते हैं या नहीं।
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