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Jhansi News: राम मंदिर आंदोलन में वानर सेना गुमनाम रहकर करती थी बड़े काम

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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। राम मंदिर आंदोलन को बजरंग दल की वानर सेना ने भी खूब धार दी। इसमें शामिल किशोर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते थे, इसके अलावा पर्दे के पीछे रहकर भी वे बड़े काम कर जाते थे। खास बात यह है कि उम्र कम होने की वजह से पुलिस को भी उन पर शक नहीं होता था। इसके अलावा पुलिस को गच्चा देने के लिए वानर सेना के सदस्य ज्यादातर समय स्कूल यूनिफार्म में ही रहते थे। हालांकि, अब वानर सेना के ज्यादातर सदस्यों के बालों पर सफेदी आना शुरू हो चुकी है और अयोध्या में राम मंदिर को बनते देखकर वे बेहद खुश हैं। उनके जेहन में मंदिर आंदोलन में निभाई गई भूमिका की यादें ताजा हो उठीं हैं।
राम मंदिर आंदोलन में बजरंग दल की बड़ी भूमिका रही थी। तब बजरंग दल में ज्यादातर युवा ही शामिल थे, जो आंदोलन के दरम्यान पुलिस के निशाने पर रहते थे। अक्सर इन्हें गिरफ्तार कर अस्थायी जेलों में भेज दिया जाता था। ऐसे में आंदोलन की धार कमजोर न पड़े, इसके लिए बजरंग दल की ओर से वानर सेना बनाई गई थी, जिसमें स्कूलों में पढ़ने वाले किशोरों को शामिल किया गया था। इनमें से ज्यादातर कक्षा 10वीं से 12वीं तक के छात्र होते थे। इस सेना में शामिल सदस्य आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए रात-रात भर घूमकर दीवारों पर नारे लिखने का काम करते थे। घर-घर जाकर झंडे लगाते थे। आंदोलन के दरम्यान निकाले जाने वाले जुलूसों में नारेबाजी भी खूब करते थे। इसके अलावा अस्थायी जेलों में बंद कारसेवकों के लिए भोजन व राशन सामग्री पहुंचाने का काम भी वानर सेना के सदस्य करते थे। ज्यादातर सदस्य स्कूल यूनिफार्म में रहते थे और उनके कंधे पर बस्ता टंगा होता था, उसी बस्ते में भरकर खाद्य सामग्री कारसेवकों तक पहुंचाते थे। उम्र कम होने व स्कूली यूनिफार्म में होने की वजह से पुलिस को उन पर शक भी नहीं होता था, जिससे वे बेरोकटोक अपने काम में जुटे रहते थे।
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वानर सेना में थे दो हजार से ज्यादा किशोर
बजरंग दल के पूर्व विभाग संयोजक विनोद अवस्थी ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन में बजरंग दल की वानर सेना की बड़ी भूमिका थी। इसमें झांसी में दो हजार से अधिक किशोर शामिल थे। आंदोलन के दरम्यान बजरंग दल की तो चर्चा होती थी, परंतु वानर सेना के सदस्य गुमनाम रहकर अपने काम में जुटे रहते थे। इनमें से ज्यादातर स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र थे, जो कारसेवकों की मदद तो करते ही थे। साथ ही आंदोलन को धार देने में पर्दे के पीछे से अपनी बड़ी भूमिका अदा करते थे। जन-जन को आंदोलन से जाड़ने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
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उत्साहित किशोरों की थी वानर सेना
विश्व हिंदू परिषद के अतुल मिश्रा ने बताया कि वानर सेना उत्साहित किशोरों का संगठन था। ये वो किशोर थे, जो स्वत: आंदोलन का हिस्सा बन गए थे। राम मंदिर आंदोलन के दौरान वानर सेना को कभी चर्चा में नहीं आने दिया गया, क्योंकि इस संगठन में ज्यादातर स्कूली छात्र शामिल थे। चर्चा में आने पर पुलिस इन किशोरों पर कार्रवाई कर सकती थी, जिससे इन्हें गुमनाम रखा गया। जबकि, मंदिर आंदोलन को जन आंदोलन बनाने में इन किशोरों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। किशोर आंदोलन को राम का काज मानते हुए उससे जुड़े हुए थे।
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