संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। धूम्रपान करने वालों, कोरोना से ग्रस्त रहे लोग और बुजुर्गों के लिए कड़ाकेे की सर्दी नुकसान पहुंचाने वाली हो रही है। इससे फेफड़ों के रोगियों में समस्या बढ़ रही है। यह बात जिला अस्पताल में हो रही फेफड़ों की जांच में सामने आई है। यहां किए जा रहे स्पाईरोेमेट्री (फेफड़ों की क्षमता मापने की जांच) टेस्ट में ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिसमें फेफड़ों के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ के साथ उनके ह्रदय की गति भी बढ़ी हुई है, जो हार्ट फेल होने का खतरा भी बढ़ा रही है।
जिला अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को वरिष्ठ फिजिशन डॉ. डीएस गुप्ता की निगरानी में फेफड़ों के मरीजों की स्पाईरोमेट्री जांच की जा रही है। इस जांच में मरीजों के फेफड़ों में फूलने और सिकुड़ने की क्षमता का आंकलन किया जाता है। चिकित्सक ने बताया कि यहां आने वाले मरीजों में दस प्रतिशत मरीज वह हैं, जिनकी उम्र 40 साल से कम है। लेकिन, वह सीओपीडी और अस्थमा रोग की चपेट में आ गए हैं। इनकी जांच में यह भी पता चला कि उनके फेफड़ों का टीएलसी (टेस्ट फॉर लंग्स कैपेसिटी) 300 से 250 तक पहुंच गई है, जो अब फेफड़ों के साथ ही ह्रदय को नुकसान पहुंचा रही है। यह वह रोगी हैं जो धूम्रपान की लत के शिकार हैं। बताया कि ऐसे मरीज अधिक आ रहे हैं, जिन्हें लेटने और बैठने के दौरान सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इन मरीजों की पल्स रेट भी 115 तक बढ़ी हुई है।
- ऐसे होती है स्पाईरोेमेट्री जांच और ये है पैमाना
स्पाईरोेमेट्री टेस्ट में मरीज को एक मशीन से जुड़े पाइप में जोर से फूंक मारने को कहा जाता है। जिससे मरीज के फेफड़ों की ताकत का पता चलता है। चिकित्सक बताते हैं कि 45 साल की उम्र पार कर चुके मरीज में यदि टीएलसी लेवल 400 है तो वह सामान्य माना जाता है। वहीं, इससे नीचे जाते ही उसमें सीओपीडी की संभावना बढ़ने लगती है। 500 टीएलसी वाले मरीज के फेफड़ों को स्वस्थ माना जाता है।
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टीएलसी कम होने पर ह्रदय को करनी होती है अधिक मेहनत
यदि किसी मरीज का टीएलसी 300 या उससे नीचे जाता है तो फिर ह्रदय को रक्त का संचार करने में मुश्किल आती है। वह तेजी से पंप करता है। इससे हार्ट फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।
हम बुधवार को स्पाईरोेमेट्री टेस्ट के लिए अलग से ओपीडी संचालित कर रहे हैं। सर्दी का मौसम सांस के रोगियों का नुकसान करता है। अबतक की जांचों में पता चला है कि युवाओं में सीओपीडी और अस्थमा की बीमारी भी तेजी से बढ़ रही है। ठंड में फेफड़ों तक ऑक्सीजन ठीक से न पहुंच पाने के चलते ह्रदय का जोखिम भी बढ़ रहा है। यदि किसी को सांस लेने में थोड़ी भी कठिनाई हो तो वह तुरंत जिला अस्पताल आकर जांच कराएं।
डॉ. डीएस गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, जिला अस्पताल।