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यूपीएससी : चौथी बार में मंजुल ने पायी मंजिल, असफलता से मिली सीख को बना दिया सफलता की सीढ़ी

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अपने माता-पिता के साथ मृदुल - फोटो : स्वयं
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अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। तीन बार असफल होने के बाद भी नई बस्ती के मंजुल राज ने हिम्मत नहीं हारी। वह कामयाब होने के आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई में जुटे रहे। मंगलवार को संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) ने परिणाम घोषित किया। चयनित अभ्यर्थियों की सूची में 956वें स्थान पर उनका नाम अंकित था। यह देख परिजनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।



नई बस्ती के पाताली हनुमान मंदिर के सामने रहने वाले राजकुमार दिल्ली में कार्यरत हैं। इनकी पत्नी मंजुलता बागपत के प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका हैं। उनके बड़े बेटे मंजुल राज की कक्षा छह तक प्रारंभिक शिक्षा झांसी में हुई। इसके बाद वह अपने पिता के साथ दिल्ली चले गए। आईआईटी बीएचयू से पढ़ाई के बाद एक निजी संस्थान में ग्रोथ मैनेजर पद पर काम किया। लेकिन कुछ दिन बाद नौकरी छोड़ यूपीएससी परीक्षा की तैयारी में जुट गए।
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अमर उजाला से फोन पर वार्ता करते हुए मंजुल राज ने बताया कि वह लगातार तीन बार असफल हुए मगर हिम्मत नहीं हारी। हर बार पूरे जोश-उत्साह के साथ तैयारी में जुटे रहे। किसी तरह का तनाव न हो, इसके लिए नियमित व्यायाम और ध्यान जारी रखा। मंजुल बताते हैं कि वह सुबह जागने के बाद पढ़ाई का लक्ष्य बनाकर तैयारी करते थे। यह बात सही है कि अधिकांश दिन लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता था मगर तनाव नहीं लेता था। वह बताते हैं कि मेरा यही कहना है कि जरूरी नहीं कि देर रात तक जागकर पढ़ाई की जाए। पढ़ाई का समय अपनी स्वेच्छा के अनुसार तय करें मगर नियमित होनी चाहिए। रोजाना का लक्ष्य तय करके तैयारी करनी चाहिए। लगातार पेपर में सफल होने के लिए प्रैक्टिस करनी चाहिए। मंजुल राज दादा बैजनाथ गुलगंज्या संगीताचार्य, दादी मिथला देवी, ताऊ सुदेश कुमार व हरविंद कुमार राष्ट्रीय एथलीट, चाचा डॉ. धर्मेन्द्र कुमार चिकित्साधिकारी रक्सा राजापुर, अनूप कुमार वर्मा लेखाकार बेसिक शिक्षा हैं। सभी ने मंजुल की सफलता पर उन्हें बधाई दी है।
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