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UP: घर बनाकर घर चला रहीं महिलाएं, दूसरों के लिए बन रहीं प्रेरणा; पुरुषों संग कंधे से कंधा मिलाकर बढ़ रहीं आगे

Mon, 03 Mar 2025 02:44 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

झांसी में महिलाएं घर बनाकर घर चला रहीं। दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहीं हैं। राजमिस्त्री का काम कर पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहीं हैं। 
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women construction workers - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समाज के हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। अब भवन निर्माण के क्षेत्र में भी महिलाएं बतौर राजमिस्त्री अपनी भूमिका अदा कर रही हैं। जबकि, यह क्षेत्र पुरुषों के एकाधिकार वाला माना जाता है लेकिन घर चलाने के लिए महिलाएं घरों का निर्माण करने में जुटी हुई हैं। धूप की तपिश हो या सर्दी, हर मौसम में अपने हौसले के बल पर ये महिलाएं ऊंची उड़ान भर रही हैं। 
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पति हुआ लाचार तो पत्नी ने संभाली कमान 
रक्सा निवासी अशोक अहिरवार राजमिस्त्री हैं। पांच साल पहले सड़क दुर्घटना में उनके दोनों पैर टूट गए थे, जिससे वह काम करने में असमर्थ हो गए थे। घर के हालात एकदम से बिगड़ गए थे। तब उनकी पत्नी पिंकी ने कमान संभाली थी और मजदूरी करने लगी थीं। 

मजदूरी करते समय वे भवन निर्माण के कार्य की बारीकियां भी सीखती गई। कुछ ही समय बाद वे बतौर राजमिस्त्री के तौर पर काम करने लगीं। अब पिंकी राजमिस्त्री के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। भवन निर्माण के ठेके भी लेने लगी हैं। 
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खुद तो ज्यादा पढ़ी-लिखी नाहीं हैं, लेकिन अपने बच्चे कृष और वर्षा की पढ़ाई पर पूरा ध्यान देती हैं। पिंकी कहती हैं कि महिलाएं कोई भी काम कर सकती हैं, बस इसके लिए उन्हें झिझक को छोड़ना होगा। 

हादसे के बाद भी नहीं टूटा हौसला 
प्रेमनगर निवासी राजा वंशकार वर्षों से राजमिस्त्री का काम करते आ रहे हैं। अपनी आमदनी के बल पर उनके लिए बेहतर ढंग से परिवार चलाना मुश्किल साबित हो रहा है। यह बात उनकी पत्नी प्रीति समझ गई और उनके साथ काम पर जाने लगी। वह मजदूरी करती थी। साथ में पति से भवन निर्माण की बारीकियां भी सीखती रहती थी और एक दिन वह खुद राजमिस्त्री बन गई। अब पति-पत्नी दोनों साथ में भवन निर्माण का काम करते हैं। दो आमदनी होने से परिवार भी बेहतर ढंग से चल रहा है। 

 

उनका बेटा प्रिंस 9वीं कक्षा में पढ़ रहा है और बेटी काजल तीसरी कक्षा में है। प्रीति ने बताया कि तीन साल पहले काम के दौरान वह छत से नीचे गिर गई थीं। हादसे में उन्हें गंभीर चोट आ गई थी। पति ने काम पर जाने से रोक दिया था लेकिन, वे अपनी जिद पर काम करती रहीं। 

 
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प्रविष्टि भेजने का आज आखिरी मौका 
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अमर उजाला की ओर से विशेष अभियान 'तुमसे है उजाला' की शुरुआत की गई है। इसके तहत अपने जुनून, हौसले और संघर्ष से अपने परिवार, समाज या समुदाय में सकारात्मक बदलाव लाने वाली महिलाओं की प्रेरणास्पद कहानियों को प्रकाशित किया जाएगा। ऐसी महिलाओं को सम्मानित भी किया जाएगा। इस अभियान में हिस्सा बनने का सोमवार को आखिरी मौका है। 
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