UP Lok Sabha Election
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झांसी जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश से घिरी हुई झांसी लोकसभा क्षेत्र की मऊरानीपुर विधानसभा में मुख्य मुकाबला भाजपा और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच रहा। किसी जमाने में बसपा का यहां मजबूत आधार हुआ करता था, लेकिन इस चुनाव में यहां हाथी की चिंघाड़ कहीं भी नहीं सुनने को मिली।
मऊरानीपुर कस्बे के प्राथमिक विद्यालय खरकासानी में बने बूथ पर सुबह 10.30 बजे तक 854 मतदाताओं में से 204 अपना वोट डाल चुके थे। यहां सुबह से ही इक्का-दुक्का मतदाताओं की आवाजाही बनी हुई थी। केंद्र के बाहर खड़े दिलीप और मोनू ने बताया कि घर के काम से फ्री होने के बाद यहां दोपहर में मतदाताओं की संख्या बढ़ेगी।
उनका कहना था कि देहात के वोटर हैं, धूप से घबराते नहीं हैं। जब उनसे पूछा गया कि उनका वोट कहां गया तो दिलीप मुस्कुराते हुए राम-राम करके आगे बढ़ गए। जबकि, मोनू ने हाथ का पंजा दिखा दिया। कमोबेश पूरे विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं का यही रुझान देखने को मिला।
कस्बाई क्षेत्रों में फूल ने दम दिखाया तो ग्रामीण इलाकों में कई जगहों पर पंजे का दबदबा नजर आया। बसपा चुनाव में कहीं भी खड़ी नजर नहीं आई। जबकि, बसपा का यहां बड़ा आधार माना जाता रहा है। 2007 के विधानसभा चुनाव में यहां से बसपा ने धमाकेदार जीत दर्ज की थी।
खिलता रहा कमल, पंजे ने दिखाया जज्बा
झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर सोमवार को हुए मतदान के दौरान झांसी नगर विधानसभा में कमल और पंजे के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। वहीं हाथी के साथियों में बिखराव दिखा। भाजपा के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर शाम तक रौनक दिखाई दी। जबकि मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पंजे ने खूब जज्बा दिखाया।
सिविल लाइन, प्रेम नगर, दतिया गेट और उनाव गेट क्षेत्र में बने मतदान केंद्रों के आसपास भाजपा और कांग्रेस (इंडिया गठबंधन) के समर्थकों के बस्तों पर सुबह से ही भीड़ नजर आने लगी थी। मुस्लिम बाहुल्य इलाके मुकरयाना, बिसातखाना, भांडेरीगेट, अलीगोल, इकबारी गंज, सैंयर गेट, खुशीपुरा इलाकों के मतदान केंद्रों में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की लाइनें सुबह
से ही लगी नजर आईं।
दोपहर में इन बूथों पर भीड़ नहीं रही, लेकिन मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के पहुंचने का सिलसिला शाम तक जारी रहा। शाम करीब साढ़े चार बजे हाफिज सिद्दीकी इंटर कॉलेज में बने मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचे बुजुर्ग मो. अब्दुल ने बताया कि लोकतंत्र के महापर्व में शामिल होने आए हैं। चुनाव में कांग्रेस, सपा और आप एकजुट हैं और मुस्लिम मतदाताओं का रुझान भी इन दलों की तरफ माना जाता है।
इसलिए मतदान के दौरान मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव दिखाई नहीं दिया। इसी तरह बसपा का गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भाजपा और कांग्रेस के बस्तों पर भीड़ दिखाई दी। इससे
बसपा का कैडर वोट भी दल बदलता नजर आया।
भाजपा, कांग्रेस में टक्कर, बसपा का भी दिखा असर
बबीना विधानसभा में अधिकतर बूथों पर भाजपा और कांग्रेस में ही सीधी टक्कर देखने को मिली। कुछ जगहों पर बसपा ने भी लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया। यहां के मतदाताओं में मतदान को लेकर खासा रुझान देखने को मिला। विधानसभा में 60.45 फीसदी मत पड़े।
गर्मी के मद्देनजर सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी। विधानसभा में दोपहर एक बजे तक 41 फीसदी वोट पड़ चुके थे। इसके बाद दोपहर में भीषण गर्मी में मतदान की रफ्तार कुछ मंद पड़ गई। अंतिम चार घंटे में बाकी वोट पड़े।
उच्च प्राथमिक विद्यालय रक्सा में दोपहर ढाई बजे तक करीब 55 फीसदी वोट पड़ चुके थे। यहां मतदान करने आईं बृजेश राजे परमार ने बताया कि देश की सीमाओं की सुरक्षा और महिला सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए मतदान किया है।
तुलसा देवी ने कहा कि चुनाव में विकास, बिजली, पेयजल मुद्दा है। प्राथमिक विद्यालय रक्सा में दोपहर तीन बजे तक 50 फीसदी मतदान हो चुका था। यहां वोट देने आईं शशि ने बताया कि उनके लिए रोजगार बड़ा मुद्दा है। वहीं, मीना ने बताया कि कानून व्यवस्था को मद्देनजर रखकर मतदान किया है।
भाजपा के गढ़ में पंजे ने की सेंधमारी
झांसी-ललितपुर लोकसभा क्षेत्र के सदर विधानसभा में भाजपा और इंडिया गठबंधन प्रत्याशी के बीच कड़ा मुकाबला रहा। दलित बाहुल्य इलाके में जहां कमल खिलता नजर आया, तो वहीं पंजे ने भाजपा के गढ़ में सेंधमारी की। सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के रुख में इस बार बदलाव नजर आया। चौबयाना, चांदमारी, रावरपुरा व रावतयाना क्षेत्र के कई केंद्रों पर कमल खिला तो वहीं गोविंदनगर, सदनशाह, जीजीआईसी, नगर संसाधन केंद्र के कंपोजिट विद्यालय सिविल लाइन के बूथों पर पंजे ने खूब दम दिखाया।
नेहरू नगर सहित कुछ केंद्रों पर कमल, हाथ और हाथी में वोट बंटते हुए नजर आए। इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा के बस्ते तो हर जगह नजर आए लेकिन बसपा के बस्ते कई स्थानों पर नजर नहीं आए। सदर विधानसभा क्षेत्र में वर्णी इंटर कॉलेज, जीजीआईसी, जीआईसी मतदान केंद्र सहित अन्य केंद्रों के बाहर राजनीतिक दलों के बस्ते तो लगे थे, लेकिन उन पर एक दो लोग ही बैठे नजर आए।
तालबेहट से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में इंडिया गठबंधन और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहा। जबकि बसपा वोट बैंक में भी दोनों दलों ने सेंधमारी की। महावीरपुरा, तहसील चौराहे, घंटाघर व सावरकर चौक जैसी जगहों पर जहां प्रत्येक चुनाव में दिनभर लोगों का जमघट लगा रहता था, इस बार वहां सन्नाटा रहा। वोट डालने के बाद लोगों ने सीधे अपने घर का रुख किया।
कहीं चली लहर तो कहीं दिखा जातिगत असर
झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट के महरौनी विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के रुख में ज्यादा तब्दीली नजर आ रही है। अधिकांश बूथों पर कमल और पंजा भिड़ने की कोशिश करते नजर आए। ग्रामीण इलाकों में जातिगत असर नजर आया तो वहीं कहीं मतदाता लहर के साथ बहते दिखे।
मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में महरौनी के कुछ मोहल्ले पठा, जीरोन, दिदौरा में महिलाओं ने भागीदारी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वहीं जैन बाहुल्य बानपुर व महरौनी कुछ मोहल्लों में जहां पंजा चला तो महरौनी नगर के कुछ मोहल्लों सहित कुम्हेड़ी, सिंदवाहा, जखौरा, बम्हौरीबहादुर में कमल भी खिला।
इससे इन दोनों दलों में कई स्थानों पर आमने-सामने का मुकाबला नजर आया। वहीं दलित बाहुल्य इलाकों में बजर्रा, खाखरौन, चिरौला आदि गांवों में भी कमल और पंजे के बीच वोट बंटे। महरौनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री है इसलिए उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।
उधर मड़ावरा क्षेत्र में भी आदिवासी समुदाय का वोट कभी बसपा में जाता था, लेकिन इस वोट में भी भाजपा और इंडिया गठबंधन ने सेंधमारी की। जिससे विधानसभा क्षेत्र में हाथी की रफ्तार धीमी नजर आई। खास बात तो यह रही कि पिछले चुनावों की तरह इस बार मतदाताओं में उत्साह नजर नहीं आया।