मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल के छह महीने पूरे हो गए हैं, लेकिन इस दौरान झांसी को कुछ भी नहीं मिला। न तो कोई नई योजना मिली और न ही पहले से चल रहे विकास कार्यों को गति। चाहे लक्ष्मीताल के गंदे पानी को साफ करने का मामला हो, या शहरवासियों की प्यास बुझाने का इंतजार कर रही पेयजल महायोजना हो, ग्वालियर रोड रेलवे क्रासिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज या फिर पार्किंग की योजना। सब फाइलों में ही है। सीपरी बाजार ओवरब्रिज पूरा नहीं हो सका और न भूमाफियाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई हो सकी है। यह स्थिति तब है, जब केंद्र और राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है।
स्मार्ट सिटी
शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल गया है। उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी बनने से शहर के विकास कार्यों में तेजी आएगी, लेकिन झांसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड का गठन होने के अलावा अब तक कुछ नहीं हुआ है। अब शहर के विकास का प्लान बनाया जाना है, इसके लिए कंसलटेंट नियुक्त किया जाएगा और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जानी है।
अवैध पार्किंग
शहर में अवैध पार्किंग बड़ी समस्या है। गाड़ियां पार्क करने को कोई जगह नहीं होने के कारण मल्टीलेबल पार्किंग बनाने पर विचार चल रहा है। रानीमहल के सामने मल्टीलेबल पार्किंग, कोतवाली के नीचे अंडर ग्रांउड पार्किंग और महारानी लक्ष्मीबाई नेत्र चिकित्सालय के पास पार्किंग बनाने की सहमति बन गई थी, लेकिन अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका। स्मार्ट सिटी का प्लान नहीं बन पाने से पार्किंग पर सर्वसम्मति नहीं बन पा रही है।
ग्वालियर रोड ओवरब्रिज
ग्वालियर रोड रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने की स्वीकृति मिल गई है। परंतु, शासन से अभी तक बजट जारी नहीं किया गया है। नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले बजट मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ऐसे में ओवरब्रिज का श्रीगणेश फिलहाल संभव नहीं है। रेलवे क्रासिंग पर लगने वाले जाम के कारण जो स्थिति पहले थी, अभी भी वही स्थिति है। इससे निजात मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
सीपरी बाजार ओवरब्रिज
सीपरी बाजार में बन रहा ओवरब्रिज मार्च 2017 में पूरा होना था, लेकिन छह महीने ज्यादा गुजर गए। अभी कम से कम तीन महीने और लग जाएंगे। ओवरब्रिज नहीं बन पाने से सीपरी बाजार के दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। इस दीवाली भी व्यापारियों की दुकानों में रौनक आने की उम्मीद नहीं है। वह जल्द बनवाने की मांग कर रहे हैं, परंतु उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
केन-बेतवा परियोजना
देश की तीन प्रमुख परियोजनाओं में से एक केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना की लागत 2008 में 9,393 करोड़ रुपये आंकी गई थी, परंतु कोई काम नहीं होने से अब यह राशि बढ़कर 18 हजार 57 करोड़ रुपये पहुंच गई है। नौ साल से यह परियोजना पर्यावरण, पन्ना टाइगर रिजर्व में वन विभाग की अनापत्ति से जूझ रही है। सच तो यह है कि अभी तक यह तय नहीं हो सका है कि परियोजना का काम मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकार करेगी या फिर अलग से बोर्ड का गठन होगा।
लक्ष्मी ताल का हाल-बेहाल
नारायन बाग के पास स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी तालाब को सुंदर बनाने के लिए 54 करोड़ रुपये की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जा रहा है। इस योजना पर अप्रैल 2015 में काम शुरू हुआ था। काम को चार चरणों में पूरा होना है। इसमें 5.16 करोड़ रुपये बजट जल निगम को मिल चुका है। इसके बाद पैसा नहीं मिला और दो साल में पहले चरण का भी काम पूरा नहीं हो सका है। काम पूरा होने की अवधि सितंबर 2018 है।
पेयजल महायोजना धरातल पर नहीं
सात साल में यह योजना 264 करोड़ रुपये से बढ़कर 916 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। योजना के लिए केंद्र सरकार पचास प्रतिशत, प्रदेश सरकार तीस प्रतिशत और नगर निगम बीस प्रतिशत बजट देगा। जल निगम ने इस योजना का पहले चरण का काम कराने के लिए 220 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है। इसमें 36 करोड़ रुपये जल निगम को काम शुरू करने के लिए मिल चुके हैं। मगर, टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण अभी तक धरातल पर काम शुरू नहीं हो सका है।
बेतवा विहार कालोनी
झांसी विकास प्राधिकरण ने बूढ़ा में 2006 में बेतवा विहार कालोनी बनाने का सपना दिखाया था। 11 साल बाद भी सपना ही है। अब तक वहां पर न तो सड़कें हैं और न ही पार्क या पानी की कोई व्यवस्था है। पिछले दिनों आठ करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर टेंडर निकाले गए थे, लेकिन अब उनके निरस्त होने की आशंका जताई जा रही है।
कान्हा उपवन योजना
नगर निगम ने छुट्टा जानवरों को रखने के लिए कान्हा उपवन योजना का प्लान तैयार कर शासन को भेज दिया था, लेकिन अब तक इसको स्वीकृति नहीं मिली है। कब स्वीकृति मिलेगी और कब काम होगा, इसका भी कोई समय नहीं है। ऐसे में लगता नहीं कि आने वाले कम से कम दो साल तक छुट्टा जानवरों की समस्या से निजात मिल पाना मुश्किल लग रहा है।
विद्युत शव दाहगृह का काम बंद
उन्नाव गेट स्थित श्मशान घाट पर पर्यावरण का सुरक्षित रखने के लिए बुंदेलखंड का एकमात्र इलेक्ट्रिक शव दाहगृह का निर्माण कार्य पैसे की कमी के कारण बंद पड़ा है। इसके लिए साढ़े सात करोड़ रुपये की जरूरत है। नगर निगम शासन को चार चिट्ठियां भेज चुका है। यहां तक लिखा गया है कि स्वीकृति दे दो, नगर निगम अपना पैसा लगा देगा, लेकिन शासन से कोई जवाब नहीं आया है।
मेडिकल कॉलेज को बजट मिला, प्रस्ताव लटके
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को हाल ही में पौने तीन करोड़ रुपये का बजट मिला। पहली बार किसी सरकार ने ऑक्सीजन गैस के लिए अलग से तीस लाख रुपये दिए हैं। हालांकि, कई अहम प्रस्ताव अभी भी लटके हुए हैं। मेडिकल कॉलेज में आई बैंक खुलने की योजना ठंडे बस्ते में है। लगभग 45 करोड़ रुपये का बजट नहीं मिलने के कारण 500 बेड अस्पताल का निर्माण रुका है।
डॉक्टरों की कमी
जिला अस्पताल में फिजीशियन, सर्जन समेत अन्य पदों पर डॉक्टरों की कमी दूर नहीं हो पाई है। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने अब संविदा पर एक हजार से अधिक डॉक्टरों की नियुक्ति निकाली है। इसके जरिए यह पद भरे जाने हैं।
शासन को लिखा है
कान्हा उपवन योजना और इलेक्ट्रिक शव दाहगृह पूरा कराने के लिए शासन को चिट्ठी लिखी है। स्मार्ट सिटी का काम शुरू करने का जल्द टेंडर निकालकर कसंल्टेंट कंपनी तय होगी। शासन में प्रक्रिया के तहत काम होता है। इसलिए, कुछ नहीं कह सकते।
- प्रताप सिंह भदौरिया
नगर आयुक्त
दोबारा हो सकते हैं टेंडर
बेतवा विहार कालोनी में सड़क, नाली और नाला निर्माण के लिए हाल ही में टेंडर डाले गए हैं। पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार का रेनावेशन और पंचतंत्र पार्क को दस साल तक रखरखाव पर देने के लिए टेंडर डाले गए, लेकिन किसी काम में एक तो किसी में दो ही टेंडर आए हैं। अंतिम निर्णय जल्द ले लिया जाएगा।
- सीपी तिवारी
जेडीए, सचिव
जल्द आएगी तेजी
इससे पहले की सरकार ने दो साल पूरे होने के बाद ही सही मायने में काम शुरू किया था। इसकी तुलना में वर्तमान सरकार बहुत तेजी से काम कर रही है, छह महीने में ही परिणाम आने लगे हैं। बदलाव की प्रक्रिया में थोड़ा तो टाइम लगता है, लेकिन सभी लंबित विकास कार्य पूरे होंगे।
- कर्ण सिंह चौहान, जिलाधिकारी
कई स्तरों की स्वीकृति के कारण हो रही देर
ग्वालियर रोड रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने के लिए शासन स्तर पर फाइल चल रही है। कई स्तरों की स्वीकृति के कारण देरी हो रही है। अन्य योजनाओं के लिए भी पैसा जारी हो व काम तेजी से शुरू हो, इसके लिए प्रयास चल रहे हैं। योगी सरकार सही दिशा में है। बहुत जल्दी विकास कार्यों में तेजी नजर आने लगेगी।
- रवि शर्मा, विधायक